इसका मतलब है कि जिला स्तर पर आवेदन की जांच के बाद मामला सीधे लाइसेंस जारी करने के बजाय सरकार की मंजूरी के लिए भेजना होगा। नए हथियार लाइसेंस के लिए जिला मजिस्ट्रेट को निर्धारित प्रारूप में पूरा औचित्य और अपनी सिफारिश देनी होगी। केवल आवेदन या औपचारिक प्रस्ताव भेजने से काम नहीं चलेगा। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद ही लाइसेंसिंग अथॉरिटी आगे की प्रक्रिया पूरी कर सकेगी। नए लाइसेंस के अलावा मल्टी स्टेट या ऑल इंडिया वैधता वाले हथियार लाइसेंस के नवीनीकरण और वैधता क्षेत्र बढ़ाने के मामलों में भी राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी जरूरी होगी।
यदि कोई लाइसेंसधारी हिमाचल के अलावा दूसरे राज्यों में हथियार रखने की अनुमति चाहता है या लाइसेंस की वैधता पूरे देश के लिए चाहता है, तो जिला स्तर पर अब इसका अंतिम फैसला नहीं हो सकेगा। ऐसे मामलों में भी औचित्य और उपायुक्त की सिफारिश के साथ प्रस्ताव सरकार को भेजना होगा। वहीं, कानूनी वारिसों के नाम हथियार लाइसेंस हस्तांतरित करने के मामलों को सरकार के पास भेजने के बजाय निर्धारित नियमों के तहत जिला स्तर पर ही निपटाया जाएगा। लाइसेंसधारी की मृत्यु के बाद, 70 वर्ष की आयु पूरी होने पर और एक ही व्यक्ति के नाम लाइसेंस के 25 वर्ष पूरे होने के बाद नियमों के अनुसार कानूनी वारिस को लाइसेंस हस्तांतरित किया जा सकेगा। इस व्यवस्था से ऐसे मामलों में अनावश्यक प्रशासनिक देरी कम होने की संभावना है।
प्रदेश में एक लाख से अधिक लाइसेंसी हथियार धारक
हिमाचल प्रदेश में लगभग 1,00,403 लाइसेंसी हथियार धारक हैं। प्रति व्यक्ति लाइसेंसी हथियारों के अनुपात के मामले में हिमाचल प्रदेश देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है। यहां औसतन हर 70वें व्यक्ति के पास लाइसेंसी हथियार मौजूद है। सबसे अधिक हथियार धारक कांगड़ा, शिमला और मंडी में हैं। पहाड़ी और कृषि-प्रधान क्षेत्र होने के कारण अधिकांश लाइसेंस फसल सुरक्षा और आत्मरक्षा के लिए जारी किए गए हैं।