हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के नजदीक समरहिल में स्थित ऐतिहासिक चैडविक फॉल में सीवरेज का पानी बहने पर संज्ञान लिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने एमसी शिमला, वन विभाग, पर्यटन विभाग और सरकार को एक हफ्ते के भीतर जवाब दायर करने के आदेश दिए हैं।
अधिवक्ता ने अदालत को वर्ष 2018 की एक जनहित याचिका का हवाला देते हुए कहा कि हाइकोर्ट के न्यायाधीश संजय करोल की खंडपीठ ने चैडविक फॉल के रखरखाव के संबंध में एक फैसला दिया था। खंडपीठ ने डिप्टी कमिश्नर शिमला को स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्देश दिए थे कि इस चैडविक फॉल के आसपास के क्षेत्र की सफाई,सुरक्षा और संरक्षण किया जाए। अदालत के आदेशों के बाद डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। इस समिति में आयुक्त, शिमला, पर्यटन निदेशक,सचिव,राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन अधिकारी, सहायक आयुक्त, नगर निगम, प्रमुख अभियंता और आईपीएच विभाग के अधिकारी को नियुक्त किया गया। जिसको इसकी देखरेख करनी थी, लेकिन अदालत के आदेशों की आज तक अनुपालना नहीं की गई है।
बता दें कि चैडविक फॉल शिमला आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। इसके आसपास कूड़े, कचरे व प्लास्टिक के ढेर लगे हुए है। साथ ही सीवरेज का नाला बह रहा है। जिसकी वजह से वहां पर पर्यटकों और आम लोगों का जाना मुश्किल हो गया है।