हिमाचल प्रदेश राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त और सदस्यों के पद खाली होने के चलते आम जनता को हो रही परेशानी पर उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह मुख्य सचिव के माध्यम से अदालत को सूचित करे कि इन पदों को किस निश्चित समय-सीमा के भीतर भरा जाएगा। अदालत ने याचिकाकर्ता की मांग को स्वीकार करते हुए सरकार को मुख्य सचिव के माध्यम से मामले में प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का आदेश जारी किया है। पीठ ने टिप्पणी की कि आयोग में सूचना आयुक्त और सदस्यों की अनुपस्थिति के कारण आम नागरिक, लोक सूचना अधिकारियों (पीआईओ) के फैसलों के खिलाफ द्वितीय अपील दायर नहीं कर पा रहे हैं।
इससे उनका कानूनन मिला अधिकार प्रभावित हो रहा है। अदालत ने उप महा अधिवक्ता को निर्देश दिए कि वे मुख्य सचिव को स्पष्ट रूप से अवगत कराएं कि सूचना के अधिकार एक्ट के तहत राज्य सूचना आयोग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर को होगी। याचिकाकर्ता कुलदीप मेहरोल की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि राज्य सूचना आयोग के पूरी तरह निष्क्रिय होने से आम नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विभिन्न सरकारी विभागों के जन सूचना अधिकारियों की ओर से जारी आदेशों को चुनौती देने के लिए प्रदेश में कोई भी अपीलीय प्राधिकरण उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सूचना का अधिकार अधिनियम का मूल मकसद ही खत्म हो रहा है।