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ऑपरेशन थियेटर असिस्टेंट भर्ती मामला: हाइकोर्ट ने कहा- शैक्षणिक योग्यता तय करना नियोक्ता का विशेषाधिकार

Wed, 23 Sep 2026 05:30 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

न्यायाधीश न्यायाधीश रंजन शर्मा की अदालत ने कहा कि अगर भर्ती नियमों और विज्ञापन की भाषा स्पष्ट है, तो न्यायिक समीक्षा के नाम पर शर्तों को शिथिल नहीं किया जा सकता। अदालत ने नरेंद्र कुमार की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला दिया है।
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अदालत(सांकेतिक)। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ऑपरेशन थियेटर असिस्टेंट भर्ती मामले में स्पष्ट किया है कि योग्यता तय करना नियोक्ता का विशेषाधिकार है। अदालत इसमें कोई बदलाव नहीं कर सकती। न्यायाधीश न्यायाधीश रंजन शर्मा की अदालत ने कहा कि अगर भर्ती नियमों और विज्ञापन की भाषा स्पष्ट है, तो न्यायिक समीक्षा के नाम पर शर्तों को शिथिल नहीं किया जा सकता। अदालत ने नरेंद्र कुमार की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की इन दलीलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ऑपरेशन थियेटर असिस्टेंट के रूप में काम करने वाले कर्मियों के लिए मानव शरीर और जैविक स्थितियों का बुनियादी ज्ञान होना जरूरी है।

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इसलिए प्लस टू में जीव विज्ञान की शर्त पूरी तरह तार्किक और वैध है। कोर्ट ने कहा कि पद की प्रकृति और जरूरत के हिसाब से न्यूनतम या अतिरिक्त योग्यता तय करने का काम सिर्फ नियोक्ता का है। नियमों के विपरीत जाकर किसी अयोग्य उम्मीदवार को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 (समानता के अधिकार) के साथ धोखा होगा। अदालत ने विज्ञापन की शर्तों को सही ठहराया और कहा कि इसमें किसी भी प्रकार की अवैधता या मनमानापन नहीं है।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग ने 16 सितंबर 2017 को जारी विज्ञापन के तहत ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट (पोस्ट कोड-642) के 113 पदों के लिए आवेदन मांगे थे। भर्ती नियमों के अनुसार उम्मीदवार का 50 फीसदी अंकों के साथ 10+2 साइंस भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान उत्तीर्ण होना और साथ ही मान्यता प्राप्त संस्थान से ओटीए ट्रेनिंग कोर्स या समकक्ष डिग्री होना अनिवार्य था। याचिकाकर्ताओं ने आवेदन किया और उन्हें मूल्यांकन के लिए भी बुलाया गया। बाद में आयोग ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया, क्योंकि उनके पास 10+2 में आवश्यक साइंस विषय (विशेषकर जीव विज्ञान) नहीं थे। कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने इस शर्त को मनमाना और अवैध बताते हुए चुनौती दी थी।

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