हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) के एक मामले में लापरवाही से फैसला सुनाने पर एक न्यायिक अधिकारी (जिला एवं सत्र न्यायाधीश) के प्रति कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की अदालत ने टिप्पणी की कि संबंधित अधिकारी के आदेश से स्पष्ट रूप से दिमाग का इस्तेमाल न करना झलकता है। यहां तक कि उन्हें मोटर वाहन अधिनियम के बुनियादी प्रावधानों की भी जानकारी नहीं है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह बेहद चौंकाने वाला है कि जिला न्यायपालिका के इतने वरिष्ठ स्तर पर बैठे अधिकारी बिना सोचे-समझे या यांत्रिक तरीके से आदेश पारित कर रहे हैं। जिला न्यायपालिका हमारी न्याय व्यवस्था की रीढ़ है। न्यायिक आदेशों को इस तरह मजाक नहीं बनने दिया जा सकता। हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि इस फैसले की एक प्रति संबंधित न्यायिक अधिकारी के सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज की जाए। उन्हें हिमाचल प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी में विशेष प्रशिक्षण और रिफ्रेशर कोर्स के लिए भेजा जाए।