याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि शिक्षा विभाग ने 29 जनवरी 2026 को अंग्रेजी शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया, इसमें पद के लिए आवश्यक योग्यताएं स्पष्ट रूप से बताई गई थी, लेकिन प्रक्रिया शुरू होने के बाद विभाग ने नियमों में बदलाव कर दिया। एक अखबार की कटिंग से यह स्पष्ट हुआ कि विभाग ने पात्रता शर्तों को बदल दिया है। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता अनूप रतन ने अदालत के समक्ष 26 मई 2026 को जारी एक स्पष्टीकरण पत्र पेश किया। यह पत्र शिक्षा सचिव की ओर से निदेशक स्कूल शिक्षा को जारी किया गया था। महाधिवक्ता ने स्वीकार किया कि उम्मीदवारों की जो अंतिम मेरिट सूची तैयार की गई, वह मूल विज्ञापन में बताई गई योग्यताओं के आधार पर नहीं, बल्कि बाद में जारी किए गए इस नए स्पष्टीकरण के आधार पर बनी थी। उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि सरकार इस पूरी मेरिट सूची का दोबारा रिव्यू करेगी। सभी उम्मीदवारों के दस्तावेजों की नए सिरे से जांच की जाएगी, जो पूरी तरह से मूल विज्ञापन की शर्तों पर आधारित होगी। याचिकाकर्ताओं की उम्मीदवारी पर भी मूल विज्ञापन की शर्तों के अनुसार ही विचार किया जाएगा। अदालत ने महाधिवक्ता के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए दायर सभी याचिकाओं का निपटारा कर दिया है।
उधर, स्कूल शिक्षा निदेशालय ने उच्च न्यायालय के आदेश के बाद 15 जून 2026 को जारी किए गए सीबीएसई स्कूलों में अंग्रेजी विषय के शिक्षकों की नियुक्ति आदेशों को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया है। 16 जून 2026 को जारी किया गया पिछला कार्यालय आदेश वापस ले लिया गया है। यह निर्णय उच्च न्यायालय की ओर से बुधवार को पारित आदेश के अनुपालन में लिया गया है। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि पात्रता मानदंड की दोबारा जांच की जाएगी। जांच के बाद जो उम्मीदवार अयोग्य पाए जाएंगे, उनके नियुक्ति आदेश रद्द कर दिए जाएंगे। ऐसे उम्मीदवारों का कार्यभार ग्रहण करना उनके पक्ष में कोई अधिकार उत्पन्न नहीं करेगा। सभी शिक्षा उप निदेशकों और संबंधित प्रधानाचार्यों को इस आदेश का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। उन्हें इन नियुक्तियों को जल्द से जल्द कार्यभार ग्रहण कराने को कहा गया है।
गाैरतलब है कि राज्य चयन आयोग की सिफारिश पर चयनित अभ्यर्थियों को हिमाचल प्रदेश में सीबीएसई संबद्ध उत्कृष्ट विद्यालयों के लिए योजना की एक उप योजना के तहत नियुक्तियां की गई हैं। चयनित शिक्षकों को प्रदेश के विभिन्न सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में पांच वर्ष की निश्चित अवधि के लिए तैनात किया जाएगा। इन शिक्षकों को प्रति माह 30 हजार रुपये का समेकित मानदेय दिया जाएगा। हालांकि, यह मानदेय एक शैक्षणिक सत्र में केवल 10 माह के लिए देय होगा। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये नियुक्तियां नियमित पदों के विरुद्ध नहीं हैं और न ही इससे भविष्य में नियमित सरकारी नौकरी का कोई अधिकार प्राप्त होगा। नियुक्त शिक्षकों को ज्वाइनिंग के समय विभाग के साथ एग्रीमेंट, बॉन्ड और स्व घोषणा पत्र भरना होगा। आवश्यकता पड़ने पर इन शिक्षकों की सेवाएं प्रदेश के अन्य सरकारी विद्यालयों में भी ली जा सकेंगी। उन्हें प्राथमिक स्तर से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक अंग्रेजी भाषा, लेखन एवं बोलचाल कौशल का प्रशिक्षण देना होगा तथा संस्थान प्रमुख के निर्देशानुसार अतिरिक्त रिमेडियल कक्षाएं भी संचालित करनी होंगी।