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Himachal : कैंसर से जूझ रहे ऑटो चालक पिता, बेटी शायना ने मेरिट से लगाया मरहम; रिश्तेदारों ने की आर्थिक सहायता

Sun, 18 May 2025 03:45 PM IST
अंकेश डोगरा नवीन ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर

सार

Shayna Kangoo Hamirpur: हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर की शायना जिसके पिता कैंसर से लड़ रहे हैं। पूरा परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, लेकिन बेटी ने आर्थिक तंगी को आड़े नहीं आने दिया और 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में 500 में से 472 अंक लेकर कला संकाय की मेरिट सूची में दसवां जबकि जिले में पांचवां स्थान प्राप्त किया है।
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शायना/शायना के परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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गंभीर कैंसर की बीमारी जूझ रहे पिता के अहसनीय दर्द पर बिटिया ने स्कूल शिक्षा बोर्ड की बारहवीं कक्षा की मेरिट में दसवां स्थान हासिल मरहम लगाया है। बिटिया के हौंसलों ने परिवार को उस दर्द से राहत दी है जिसे वह बीते चार वर्षों से जूझ रहे है। परिवार में चली आर्थिक तंगी शायना के हौंसले तोड़ नहीं पाई। आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के बावजूद राजकीय मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कांगू की शायना ने 500 में से 472 अंक लेकर कला संकाय की मेरिट सूची में दसवां जबकि जिला में पांचवां स्थान प्राप्त किया है। शायना का सपना आईपीएस अधिकारी बनना है।

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शायना का सफर आसान नहीं रहा है। आर्थिंक तंगी के साथ कैंसर की गंभीर बीमारी से भी परिवार लड़ रहा है। बीमार सिर्फ शायना के पिता अश्वनी है लेकिन कैंसर से लड़ाई पूरा परिवार लड़ रहा हे। तमाम विपरित परिस्थितियों के बावजूद शायना ने पढ़ाई में कोई कमी नहीं छोड़ी। स्कूल के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई करके तैयारी को मजबूत किया और यह मुकाम हासिल किया।
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शायना के पिता अश्वनी ऑटो चालक हैं जबकि माता कंचन देवी गृहिणी हैं। अश्वनी दिल्ली में ट्रक चालक थे। लेकिन चार साल पहले 2021 में पीठ के असहनीय दर्द के कारण वह ट्रक चला नहीं पा रहे थे। जांच में तीसरी स्टेज के कैंसर का पता चला और नौकरी भी छूट गई। शायना इस दौरान आठवीं कक्षा में थी। पिता का चार साल से कैंसर का इलाज चल रहा है। अभी कुछ हद तक ठीक हुए तो ऋण लेकर ऑटो डाला ताकि परिवार को आर्थिक तंगी से जूझना न पड़े।

हालांकि चार साल तक शायना के मामा-मामी तथा अन्य रिश्तेदारों ने अश्वनी के परिवार की आर्थिक मदद की। शायना की बड़ी बहन की शादी हो गई है। बड़ी बेटी मीना को स्नातक के बाद परिवार के आर्थिक हालतों से पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। मामा सुरेंद्र भट्टी ने शाइना कहा था कि यदि वह 12वीं में 90 फीसदी से अधिक अंक लाएगी तो आगे की पढ़ाई का खर्चा वह उठाएंगे। शायना ने अपनी सफलता का श्रेय अभिभावकों और परिवार सदस्यों को दिया है।
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