हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सोमवार को एसपी शिमला संजीव गांधी की ओर से दायर अपील याचिका सुनवाई के लिए लगी। प्रदेश सरकार की ओर से इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर दिया। वहीं सीबीआई की ओर से इस मामले में अपना जवाब दायर किया गया है।
गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सीबीआई की ओर से आईएएस हरिकेश मीणा की जमानत याचिका में दायर जवाब में झूठे तथ्य पेश किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि एएसआई पंकज को संजीव गांधी के कहने पर बिलासपुर भेजा गया था। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और रंजन शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि अगर कोई भी तथ्य रिकॉर्ड पर लाने हैं तो वह दायर कर सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्तूबर को होगी।
आईपीएस संजीव गांधी ने निजी तौर पर दायर अपील में आग्रह किया था कि बतौर एसपी उनकी व एसआईटी के सदस्यों की पेशेवराना प्रतिष्ठा को नुकसान न पहुंचे। अदालत ने इस पर सहमति जताई थी। अपील में बताया गया कि एकल जज के फैसले में एसपी शिमला की ओर से गठित एसआईटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं, जिससे उनकी व्यक्तिगत छवि को आघात पहुंचा है। याचिका में बताया गया है कि एसआईटी पूरी ईमानदारी से अपनी जांच कर रही थी। कोर्ट की ऐसी टिप्पणी की वजह से पुलिस के मनोबल को धक्का लगा है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने संजीव गांधी की अपील में सीमित मुद्दे पर प्रतिवादियों राज्य सरकार सहित सीबीआई और किरण नेगी को नोटिस जारी कर जवाब दायर करने को कहा था।