सर्दी, गर्मी या बरसात कोई भी मौसम हो छात्रों को बस इस चारों तरफ से खुले शेड में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। विपरीत हालात में बच्चे पढ़ाई पर कितना ध्यान केंद्रित कर पाते होंगे। यहां तीन कक्षाएं एक साथ बैठती हैं। अधिक बारिश होने पर केवल तीसरी कक्षा के छात्रों को घर भेज दिया जाता है ताकि अन्य कक्षाओं के छात्र बीच में बैठकर बारिश से बच सकें।
करीब 15 साल पहले गुज्जर समुदाय के बच्चों के लिए यहां पहली और दूसरी कक्षा तक एनआरएसटी योजना के तहत व्यवस्था की गई थी। इन दोनों कक्षाओं में यहां अभी 12 छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं। यह दोनों कक्षाएं अलग चलती हैं। इसके बाद अक्तूबर 2022 में विधायक सुखराम चौधरी के प्रयासों से यहां प्राथमिक पाठशाला खोली और एक टीन के शेड का भी निर्माण करवाया। आज तक ऐसा ही है, जो चारों तरफ से खुला। इस प्राथमिक पाठशाला में तीसरी से पांचवीं कक्षा तक 33 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और मिड-डे मील भी बनता है। स्कूल के अन्य जरूरत के सामान व दस्तावेजों को अलमारी में एक निजी घर में रखना पड़ रहा है।
एसएमसी अध्यक्ष नैक्का देवी, जमीला, बानो आदि ने बताया कि कई वर्षों से उनका घर छल्लु वाला में है। सरकार ने स्कूल खोल कर उनके बच्चों को नई दिशा दी है। इससे पहले उनके बच्चों को दो से तीन किलोमीटर दूर नारी वाला जाना पड़ता था। उन्होंने स्कूल के लिए भवन बनाने के लिए सरकार और वन विभाग के अधिकारी को पत्र भेजा है।
स्कूल प्रभारी जीवन ने बताया कि स्कूल के पास भवन नहीं है। टीन शेड के नीचे स्कूल चलता है। मिड डे मील भी इसी शेड में बनता है। शिक्षा खंड अधिकारी पांवटा साहिब अरुणा अत्रि ने बताया कि वन विभाग की जमीन होने से भवन बनाने में समस्या आ रही है। विभाग के साथ जमीन उपलब्ध करवाने के बारे में पत्राचार किया गया है। जमीन मिलने के उपरांत ही कोई कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।