उन्होंने कहा कि ऐच्छिक निधि धन का उपयोग किसे, कितना और किस प्रक्रिया के तहत किया गया, यह जानने का अधिकार प्रत्येक नागरिक को है। सार्वजनिक धन किसी व्यक्ति विशेष की संपत्ति नहीं, बल्कि जनता की अमानत है। इसका पूरा हिसाब जनता के सामने आना चाहिए। उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में एक समान और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है। यदि जांच और हिसाब होगा तो सबका होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पारदर्शिता से जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास और मजबूत होगा। सच्चाई सामने आएगी, सार्वजनिक धन के प्रत्येक रुपये का हिसाब होगा।