अध्ययन दल में डॉ. पंकज सोनी, डॉ. पंकज कुमार और डॉ. मनोज शामिल हैं, जबकि फॉरेंसिक विभाग भी सहयोग कर रहा है। विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप कश्यप के अनुसार अब तक 40 हृदयों में से 15 पर परीक्षण पूरे हो चुके हैं। यह शोध मृतकों के हृदयों पर किया जा रहा है और प्राप्त डाटा से भविष्य में उपकरण निर्माण में सटीकता बढ़ेगी। हर क्षेत्र के लोगों के शरीर की बनावट और अंगों का आकार अलग होता है।
हृदय की 'कोरोनरी साइनस' में जब उपकरण डाला जाता है, तो उसकी लंबाई और व्यास का सही माप बेहद जरूरी होता है। यही जानकारी अब तक हिमाचल के संदर्भ में उपलब्ध नहीं थी। इसी तरह तिल्ली (स्प्लीन) के आकार का माप भी किया जा रहा है। यह अंग शरीर में खून को फिल्टर करने और संक्रमण से लड़ने का कार्य करता है। पुरानी लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट करने और संक्रमण से लड़ने के लिए सफेद रक्त कोशिकाओं का निर्माण करने का काम करता है।