सात सितंबर को जारी करेक्शनडम में इसकी जानकारी दी गई है। बिजली बोर्ड के करीब 28 लाख उपभोक्ताओं की मासिक बिलिंग इसी सिस्टम के माध्यम से होती है। बिल तैयार करने से लेकर भुगतान का रिकॉर्ड रखने और उपभोक्ताओं से जुड़े आंकड़ों के प्रबंधन में इसकी अहम भूमिका है। इसके अलावा बोर्ड के वित्तीय कामकाज, खरीद, स्टोर, मानव संसाधन और अन्य ऑनलाइन प्रशासनिक कार्य भी इसके माध्यम से संचालित होते हैं। विशेषज्ञ एजेंसी मौजूदा ईआरपी और बिलिंग सिस्टम की कार्यक्षमता की जांच करेगी, साथ ही यह भी देखा जाएगा कि सिस्टम में आने वाले समय की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता है या नहीं। एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर बिजली बोर्ड फैसला करेगा कि मौजूदा सिस्टम को अपग्रेड किया जाए या नया प्लेटफॉर्म लागू किया जाए। इसका उद्देश्य बोर्ड के ऑनलाइन कामकाज और उपभोक्ता बिलिंग व्यवस्था को अधिक बेहतर और आधुनिक बनाना है।