ये कदम बच्चों की सुरक्षा और स्कूल भवन की लंबी लाइफ के लिए उठाया है। मिट्टी की क्षमता के अनुसार ही स्कूल भवन बनाने के लिए सरिया, सीमेंट समेत अन्य निर्माण सामग्री का प्रयोग किया जाएगा। प्रदेश में कई स्कूल भवन ऐसे हैं, जो बिना मिट्टी क्षमता जांच के बना दिए गए। ऐसे में अब दिक्कतें आनी शुरू हो गई हैं। कई स्कूल भवन क्षतिग्रस्त होना भी शुरू हो गए हैं। इससे पहले शिक्षा विभाग की ओर से नालों और खड्ड से स्कूल भवनों की दूरी निर्धारित की है। वहीं, यदि स्कूल भवन बनाने की चयनित की जगह नियमाें के अनुरूप नहीं होगी तो अन्य जगह तराशी जाएगी।
गौर रहे कि आपदा में प्रदेश में स्कूलों को काफी नुकसान पहुंचा है। कहीं डंगा गिर रहा है तो कहीं स्कूल भवन के भीतर दरारें पड़ रही हैं। इससे स्कूली बच्चों को पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वर्ष 2023 की बरसात में भी कई स्कूल भवनों को नुकसान पहुंचा था। बरसात में बारिश के बाद कई स्कूल भवनों की हालत खराब हो गई थी। इनमें से कई स्कूलों को असुरक्षित घोषित कर दिया था। इसके बाद नए कमरे बनाने के निर्देश भी विभाग ने दिए थे। अब ऐसे कमरों को बनाने से पहले भी मिट्टी की जांच लैब में होगी। वहीं, इस वर्ष भी अधिक बरसात के कारण कई स्कूलों के भवनों की हालत खराब हो रही है। हालांकि, शिक्षा विभाग की टीम इसकी जांच भी कर रही है।
स्कूलों के निर्माण से पहले मिट्टी की क्षमता जांचनी जरूरी है, जिससे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। क्षमता के अनुसार ही स्कूल भवन में मेटिरियल का इस्तेमाल किया जाएगा। - गोपाल सिंह चौहान, उच्च शिक्षा उपनिदेशक, सोलन।