इससे पहले नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि निजी अस्पतालों में कितने लोगों को उपचार किया गया, इसकी जांच करने के साथ-साथ जानकारी दें। हमारा किसी अस्पताल से लेना देना नहीं है। मरीजों को दवाइयां नहीं मिलने से मृत्यु हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने राजनीतिक लाभ लेने के लिए प्रदेश की धन संपदा को लुटा दिया, जिससे वह फिर से सरकार में आ सके। हिमकेयर के नाम पर 350 करोड़ रुपये निजी अस्पतालों को लुटा दिए गए। इनमें से 190 करोड़ का भुगतान मौजूदा सरकार कर चुकी है। पूर्व सरकार के दौरान हिमकेयर योजना के तहत 9.50 लाख लोग इलाज करवाने के लिए बाहर चले गए। इससे प्रदेश की जीडीपी को एक हजार करोड़ का नुकसान हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने बीते 2 साल में हिमकेयर पर 306 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने कहा कि एक एमबीबीएस डॉक्टर ने अपना अस्पताल खोल दिया और हिमकेयर में पंजीकृत हो गया। एक वर्ष में 6-6 करोड़ रुपये लेकर एक मंजिला भवन 5 मंजिला में बदल गया। प्रदेश सरकार ने हिमकेयर योजना बंद नहीं की। कितनों लोगों का हिमकेयर में इलाज हुआ, इसकी भी जानकारियां जुटाई जा रही हैं। यह भी पता किया जा रहा है कि अस्पताल में जो इलाज हुआ, उससे संबंधित उपकरण भी वहां हैं या नहीं। क्या जुकाम वालों के साथ ऑपरेशन भी लिखा दिया। हिमकेयर फ्री है। अल्ट्रासाउंड के साथ सभी टेस्ट लिख दिए गए। डायलिसिस के बिल बड़े आ रहे हैं। इसकी जांच होगी। यह सब नेता प्रतिपक्ष के सामने लाया जाएगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में हम नीचे क्यों पहुंच, ये कारण थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार हेल्थ सेक्टर में फोकस कर रही है। एक वर्ष के भीतर मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल में सुधार देखने को मिलेगा। पैट स्कैन रोबोटिक सर्जरी के ऑर्डर जारी हो गए हैं। बिलासपुर एम्स में अच्छी एमआरआई पैट स्कैन मशीनें लगेगी। आईजीएमसी में जो मशीन है, वह 19 वर्ष पुरानी है और इसी तरह टांडा में जो मशीन है, वह 17 वर्ष पुरानी है। ऐसे में व्यवस्था परिर्वतन की दिशा में आगे बढ़ते हुए टांडा, आईजीएमसी और नेरचौक में एम्स की तर्ज पर एमआरआई मशीनें लगेंगी।