उन्होंने कहा कि शोंगटोंग प्रोजेक्ट का दिसंबर 2026 को इसका पहला यूनिट शुरू होना चाहिए। मार्च 2027 में तीनों यूनिट आरंभ होने चाहिए। इससे साढ़े 400 मेगावाट बिजली प्रदेश को मिल सकेगी। इस परियोजना से समय पर बिजली उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने समानांतर ट्रांसमिशन लाइन स्थापित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने निगम को राज्यभर में नई सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने के लिए नए स्थानों की पहचान करने के भी निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने 130 मेगावाट की काशांग-दो और तीन, 48 मेगावाट की चांजू-तीन, 40 मेगावाट की रेणुका बांध और 191 मेगावाट की थाना प्लाऊं जल विद्युत परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं को तय समय में पूरा करने के निर्देशों की सख्ती से अनुपालना सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने पंप भंडारण परियोजनाओं की स्थापना पर बल दिया और निगम को प्रस्तावित 1630 मेगावाट की रेणुकाजी पंप भंडारण परियोजना तथा 270 मेगावाट की थाना प्लाऊं पंप भंडारण परियोजना पर जल्द से जल्द काम शुरू करने को कहा।
उन्होंने कहा कि पंप भंडारण परियोजनाएं व्यस्त समय में बिजली की आपूर्ति करने और ग्रिड पर भार कम करने में उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि हरित ऊर्जा का दोहन राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। एचपीपीसीएल की ओर से कार्यान्वित की जा रही सौर ऊर्जा परियोजनाओं के कार्यों में भी तेजी लाने को कहा। उन्होंने निगम को अपनी कार्यशैली में व्यावसायिकता अपनाने के निर्देश देते हुए कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने अगले वर्ष तक हिमाचल प्रदेश को देश का हरित ऊर्जा राज्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।