बुधवार को वह चंबा शहर में जेबीटी की परीक्षा देकर सीधे रिश्तेदारी में आयोजित मुंडन संस्कार में शामिल होने पहुंची थीं। मुंडन संस्कार की खुशियों के बीच किसी ने नहीं सोचा था कि यह रात उनके जीवनभर की दर्द बन जाएगी। देर रात अनीता अपने ताऊ चुनी लाल, देवी सिंह, मोती राम, ताई बबली देवी और कुंता देवी सहित अन्य परिजनों के साथ नुआले की धाम खाने के बाद बोलेरो गाड़ी में सवार होकर घर लौट रही थीं। सभी लोग हंसी-खुशी अपने घर की ओर जा रहे थे लेकिन रास्ते में हुई दर्दनाक दुर्घटना से पूरे क्षेत्र में मातम पसर गया
मुंडन संस्कार में शामिल होने के लिए हंसी-खुशी घर से निकले लोगों को क्या पता था कि यह उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। बोलेरो दुर्घटना में सात लोगों की मौत ने कई परिवारों को ऐसे जख्म दिए हैं जिन्हें वे ताउम्र नहीं भूल पाएंगे। महल गांव के एक ही परिवार के छह सदस्य जब वीरवार शाम सफेद कफन में लिपटे घर पहुंचे तो पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया। अपनों के शवों को देखते ही परिजनों की चीख-पुकार से हर किसी की आंखें नम हो गईं। दर्दनाक हादसे में वाहन चालक मनोहर की भी मौत हो गई। मृतक अपने पीछे पत्नी और दो छोटे-छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। उनके पिता और भाई का पहले ही निधन हो चुका था। ऐसे में परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। वह अपनी मां, विधवा भाभी और भाई के दो बच्चों (एक सात वर्षीय और दूसरा 12 वर्षीय) का सहारा थे। परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी भी वह ही निभा रहे थे लेकिन एक पल में हुए इस हादसे ने परिवार का इकलौता सहारा छीन लिया। अब उनकी पत्नी भी विधवा हो गई है और मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है।