संयुक्त सुरक्षा समीक्षा समिति ने निर्णय लिया कि निशांत शर्मा और उनके परिवार को दी गई पुलिस सुरक्षा पर राज्य सरकार और हिमाचल प्रदेश पुलिस की ओर से किए गए खर्च की वसूली निशांत शर्मा से की जाए। इसके बाद राज्य सीआईडी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने संबंधित पुलिस इकाइयों से सुरक्षा में तैनात कर्मियों पर हुए खर्च का ब्योरा प्राप्त किया। पुलिस महानिदेशक कार्यालय ने नोटिस के साथ सुरक्षा पर हुए खर्च का विवरण भी संलग्न किया है। नोटिस की प्रतिलिपि अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राज्य सीआईडी, पुलिस अधीक्षक कांगड़ा और द्वितीय भारत रिजर्व बटालियन सकोह के कमांडेंट को भी भेजी गई है।
दो चरणों में हुआ 68.60 लाख रुपये का खर्च
कांगड़ा पुलिस की ओर से उपलब्ध कराए गए खर्च के विवरण के अनुसार सुरक्षा पर एक अवधि में 37 लाख 96 हजार 589 रुपये खर्च हुए। वहीं, दूसरी अवधि में द्वितीय भारत रिजर्व बटालियन, सकोह, धर्मशाला की ओर से 30 लाख 63 हजार 913 रुपये का खर्च बताया गया। पुलिस के अनुसार यह सार्वजनिक धन से किया गया खर्च है, जिसे संयुक्त सुरक्षा समीक्षा समिति ने संबंधित व्यक्ति से वसूलने का निर्णय लिया है।
अवमाननापूर्ण नोटिस प्रदेश उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट न्यायिक आदेशों की गरिमा को चुनौती: निशांत
निशांत शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक की ओर से जारी अवमाननापूर्ण नोटिस राज्य उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट न्यायिक आदेशों की गरिमा, प्राधिकार और सर्वोच्चता को चुनौती देता है तथा न्यायालयों के निर्देशानुसार प्रदत्त राज्य-सुरक्षा के लिए धनराशि की मांग करता है। उन्हें पुलिस महानिदेशक की ओर से एक ऐसा नोटिस मिला है जिसकी भाषा, विषयवस्तु और उसमें की गई मांग न केवल अत्यंत गंभीर है, बल्कि प्रथमदृष्टया हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय की ओर से पारित स्पष्ट एवं बाध्यकारी न्यायिक आदेशों की अवमानना तथा उनकी न्यायिक गरिमा को चुनौती देने वाली प्रतीत होती है। वह यह स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि वह किसी भी प्रकार के दबाव के समक्ष आत्मसमर्पण नहीं करेंगे। वह हर उपलब्ध वैधानिक एवं न्यायिक मंच का उपयोग करेंगे।