मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना को लेकर मंत्री ने स्पष्ट किया कि स्वावलंबन योजना पर फिलहाल अस्थायी रोक है। पूर्व की देनदारियों का भुगतान करने के बाद ही योजना को शुरू किया जाएगा। हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि सरकार का कार्यकाल सवा साल शेष है। 2025 तक विभिन्न विभागों में 32,223 सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। दिसंबर 2026 तक इस आंकड़े को 50 हजार तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके बाद अगले साल 30 हजार से ज्यादा नौकरियां देने का लक्ष्य है। चौहान ने कहा कि जब पूर्व सरकार सत्ता से गई थी, तब प्रदेश पर करीब 75 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अब करीब एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। कर्ज बढ़ता रहेगा, इसे पूरी तरह रोकना संभव नहीं है। मौजूदा सरकार को पिछली सरकार की कर्मचारियों और पेंशन से जुड़ी देनदारियां भी मिली हैं। रोजगार के लिए निजी क्षेत्र को बढ़ावा देना जरूरी है। कोई भी सरकार प्रदेश के सभी युवाओं को सरकारी नौकरी नहीं दे सकती।
उन्होंने कहा कि सरकार मिल्कफेड के माध्यम से करीब 25 हजार परिवारों को जोड़ रही है और दूध खरीद पर इस वर्ष करीब 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार ऐसी नीतियां बना रही है, जिससे निवेशक हिमाचल आएं और रोजगार के नए अवसर पैदा हों। खनन से प्रदेश की आय अब करीब 450 करोड़ रुपये हो गई है, जबकि पूर्व भाजपा सरकार में यह करीब 240 करोड़ रुपये थी। सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में 1,60,729 रोजगार सृजन के अवसर पैदा किए हैं। चौहान ने आउटसोर्स भर्ती का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी शुरुआत भाजपा सरकार के कार्यकाल में 2010-11 में हुई थी। मौजूदा सरकार भी जरूरत के अनुसार भर्ती कर रही है। भांग की औषधीय खेती का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सीबीडी आधारित मेडिसिन कैनबिस से किसानों को आय और प्रदेश को राजस्व मिलेगा। मंत्री ने बताया कि केंद्र के वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार बेरोजगारी दर 5.4 प्रतिशत है, जबकि हिमाचल में यह 6.5 प्रतिशत है।