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हिमाचल: कांगड़ा से जम्मू के लिए जल्द शुरू होगी हवाई उड़ान, पर्यटकों के साथ स्थानीय लोगों मिलेगा लाभ

Mon, 31 Aug 2026 07:40 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, गगल (कांगड़ा)।

सार

विमानन कंपनियों ने भी इस रूट पर सेवा शुरू करने के लिए रुचि दिखाई है।
सीधी उड़ान शुरू होने से पर्यटकों के साथ ही कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर, ऊना और आसपास के क्षेत्रों से माता वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी। 
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गगल हवाई अड्डा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कांगड़ा और जम्मू-कश्मीर के बीच हवाई कनेक्टिविटी को मजबूती मिलने वाली है। गगल एयरपोर्ट से जल्द जम्मू के लिए सीधी उड़ानें शुरू की जाएंगी। इस नई विमान सेवा से दोनों राज्यों के बीच सफर बेहद आसान हो जाएगा और यात्रियों के समय में भारी बचत होगी। विमानन कंपनियों ने भी इस रूट पर सेवा शुरू करने के लिए रुचि दिखाई है। सीधी उड़ान शुरू होने से पर्यटकों के साथ ही कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर, ऊना और आसपास के क्षेत्रों से माता वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी। वहीं, जम्मू-कश्मीर से हिमाचल आने वाले पर्यटकों और अन्य यात्रियों के लिए भी कांगड़ा पहुंचना सुगम होगा। इससे दोनों क्षेत्रों के बीच धार्मिक पर्यटन, व्यापार और आपसी संपर्क को नई गति मिलेगी। गगल एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपग्रेड करने और बड़े विमानों की लैंडिंग के लिए विस्तार कार्य की तैयारी चल रही है। गगल एयरपोर्ट के निदेशक अमित सकलानी ने बताया कि औपचारिकताएं पूरी होते ही अगले कुछ महीनों में जम्मू के लिए पहली व्यावसायिक उड़ान रवाना हो सकती है। सुरक्षा और नागरिक उड्डयन मंजूरियां मिलने के बाद शेड्यूल तय होगा। यह कदम भविष्य में एयरपोर्ट से अन्य नए हवाई रूट जोड़ने में भी अहम साबित होगा।

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गगल में अब कम विजिबिलिटी में भी आसानी से लैंड होंगे विमान
 कांगड़ा के गगल एयरपोर्ट पर अब खराब मौसम और कम विजिबिलिटी में भी विमान आसानी से लैंड हो सकेंगे। एयरपोर्ट पर स्थापित डॉप्लर वेरी हाई फ्रिक्वेंसी ओमनी डायरेक्शनल रेंज (डीवीओआर) में वर्षों से लंबित पड़ा आधुनिक उपकरण जोड़ दिया गया है। यह उपकरण पायलट को मौसम की सटीक जानकारी उपलब्ध कराएगा। गगल एयरपोर्ट के निदेशक अमित सकलानी ने बताया कि पहले विजिबिलिटी पांच किलोमीटर से कम होने पर विमानों की लैंडिंग में काफी परेशानी आती थी। खराब मौसम के चलते अक्सर उड़ानें रद्द या डायवर्ट करनी पड़ती थीं। उन्होंने कहा कि अब नया सिस्टम लग जाने से तीन किलोमीटर या उससे भी कम विजिबिलिटी होने पर भी पायलट को दृश्यता स्पष्ट मिलेगी, जिससे उड़ानों का संचालन सुगम होगा। इस व्यवस्था का लाभ बड़े विमानों के साथ हेलिकॉप्टरों को भी मिलेगा, जिससे कम दृश्यता में उनकी लैंडिंग भी सुरक्षित हो सकेगी। इसके साथ ही गगल एयरपोर्ट ने अपने एयर स्पेस का नियंत्रण पूरी तरह अपने हाथ में ले लिया है। अब 10,500 फीट की ऊंचाई और 12 मील की परिधि में विमानों का पूरा संचालन और एयर स्पेस कंट्रोल सीधे गगल एयरपोर्ट से ही किया जाएगा।
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