सरकार का प्रयास है कि मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त फैकल्टी और विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध हों। मुख्यमंत्री ने बताया कि दूरदराज के मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों और फैकल्टी की कमी के समाधान को लेकर हाल ही में बैठक भी हुई है, जिसमें संबंधित विधायक और विधानसभा अध्यक्ष भी मौजूद थे। सरकार इस समस्या के स्थायी समाधान के विकल्पों पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी शिमला और डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा में भी फैकल्टी पूरी करने में काफी समय लगा था। इसी अनुभव को देखते हुए चंबा जैसे नए एवं दूरदराज के मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है।
करुणामूलक आधार पर 1,620 आश्रितों को मिली सरकारी नौकरी
हिमाचल प्रदेश में वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक 1,620 आश्रितों को करुणामूलक आधार पर रोजगार दिया जा चुका है। मुख्यमंत्री की ओर से विधानसभा में सदन पटल पर यह जानकारी लिखित जवाब के रूप में दी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्य पात्र आवेदकों को भी करुणामूलक आधार पर रोजगार देने की प्रक्रिया जारी है। सरकार की ओर से दिए गए लिखित जवाब के अनुसार करुणामूलक आधार पर रोजगार के लिए परिवार की वार्षिक आय सीमा को 2.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये प्रति परिवार किया गया है। इस संबंध में वित्त विभाग ने 8 अक्तूबर 2025 और 1 जुलाई 2026 को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
नक्षत्र वाटिका और स्वरोजगार धाम पर उठे सवाल
भाजपा विधायक राकेश जमवाल ने प्रश्नकाल के दौरान नौणी विश्वविद्यालय की नक्षत्र वाटिका और स्वरोजगार धाम पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन कामों के लिए टेंडर नहीं किए गए। कोटेशन के माध्यम से काम किया गया। जवाब में बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि यह कार्य राज्यपाल की परिकल्पना हैं। इस कार्य में कोई गड़बड़ी हुई तो विधायक तथ्य दें। इस पर विधायक ने कहा कि क्या राज्यपाल ने कहा है कि टेंडर मत करो। जब नौणी विवि में सिविल विंग हैं तो कोटेशन करवाने की मंशा क्या है। इस पर मंत्री नेगी ने कहा कि कोटेशन भी एक तरीका है। कम समय में काम करवाने के लिए ऐसा किया जाता है।