एचआरटीसी के कई डिपुओं, विशेषकर हमीरपुर, शिमला और सोलन में बसों की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही है। इन क्षेत्रों से लगातार अतिरिक्त बसें उपलब्ध कराने की मांग उठती रही है। कई स्थानीय विधायकों और मंत्रियों ने भी सरकार और परिवहन विभाग के समक्ष अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों के लिए नई बसें उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। निगम का मानना है कि नई इलेक्ट्रिक बसों के शामिल होने से पुराने और अधिक रखरखाव वाली बसों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही डीजल की खपत घटने से परिचालन लागत में भी कमी आएगी। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से प्रदूषण कम करने और हरित परिवहन को बढ़ावा देने के सरकार के लक्ष्य को भी बल मिलेगा।
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि परिवहन विभाग और एचआरटीसी अधिकारियों के अनुसार नए बेड़े के लिए आवश्यक चार्जिंग ढांचे को भी चरणबद्ध तरीके से मजबूत किया जा रहा है, ताकि बसों का संचालन बिना किसी बाधा के किया जा सके। जिन डिपुओं में चार्जिंग स्टेशन स्थापित हो चुके हैं, वहां इन बसों को प्राथमिकता के आधार पर तैनात किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य प्रदेश के दूरदराज और व्यस्त रूटों पर सार्वजनिक परिवहन को अधिक विश्वसनीय बनाना है। निगम के बेड़े में 297 इलेक्टि्रक बसें जुड़ रही है। इन बसों को उन डिपो में भेजा जाएगा जहां बसों की कमी है।