उधर, मेडिकल कॉलेजों के फैकल्टी सदस्यों ने इस फैसले का विरोध किया है। एआईएमएसएस चमियाना फैकल्टी एसोसिएशन के महासचिव डॉ. यशवंत वर्मा ने कहा कि छुट्टियां करना चिकित्सकों के साथ अन्याय है। मेडिकल कॉलेजों में परीक्षा सहित अन्य रूटीन गतिविधियों के लिए चिकित्सक दूसरे कॉलेजों में नहीं जाएंगे। इससे एकेडमिक गतिविधियां ओर चिकित्सकों का विकास रुक जाएगा। उन्होंने बताया कि पूर्व में सहायक आचार्य स्तर के चिकित्सकों को गर्मी में सात दिन और सर्दी में 37 दिन की छुट्टियां दी जाती थी। कभी तो ये छुट्टियां 45 दिन की भी होती थी। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस फैसले पर पुन: विचार किया जाए।