विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद द्वारा बाल स्कूल में आयोजित की जा रही कार्यशाला में जान
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पेड़-पौधों की सुगंध से बीमारियां दूर करने के तरीके बताए
बाल स्कूल हमीरपुर में आयोजित कार्यशाला में किए प्रयोग
विभिन्न वैज्ञानिकों ने सरलतम प्रयोग कर रस की गुणवत्ता को समझाया
अमर उजाला ब्यूरो
हमीरपुर। विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद के सौजन्य से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाल हमीरपुर में रासायनिक तत्व की आवर्त सारिणी विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला के अंतिम दिन अनेकों सरलतम और महत्वपूर्ण रासायनिक विज्ञान के विषयों पर चर्चा की गई। जिला विज्ञान पर्यवेक्षक अश्वनी चंबियाल ने बताया कि सुबह पहले सत्र में डा. आनंद अखिला पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक सीएसआईआर ने पेड़ पौधों में पाई जाने वाली सुगंध से तरह-तरह की बीमारियों को दूर करने के तरीके संजीव प्रदर्शित करके बताए। वहीं प्रकृति में बिखरी सुगंध को बोतल में बंद करने के तरीके भी बताए। प्राकृतिक सुगंध के प्रयोग से सुंदर एवं स्वास्थ्यवर्द्धक वैक्स, कैंडल बनाने का भी प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि ऐरोमॉथरैपी से विकसित देशों की भांति भारत में भी सभी प्रकार की बीमारियों का इलाज किया जा सकता है।
डॉ. राज मेहरोत्रा ने विज्ञान के प्रयोगों की शृंखला को आगे बढ़ाते हुए बिना चाकू के खून (कृत्रिम रक्त), बिना जले कपड़े पर आग का जलना, रंगहीन द्रव्यों से रंगीन द्रव्य बनाने का संजीव प्रदर्शन करके सरलतम प्रयोगों से समझाया। इस कार्यशाला में लगभग 200 अध्यापकों और छात्रों ने भाग लिया। कार्यशाला के अंतिम सत्र में स्वाति वेडेकर ने सरलतम तरीके से रासायनिक पदार्थों की संरचना छात्रों को समझाने के लिए संजीव तरीके से कैमकार्ड प्रकार के फूलों के रस को पेपर पर रगड़कर लवण और अमल के प्रभावों को फूलों के रस पर सरलतम प्रयोग कर रस की गुणवत्ता को समझाया। कार्यशाला के समापन में प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक बलवंत कुमार नड्डा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने कार्यशाला में बतौर रिसोर्स पर्सन की भूमिका में डॉ. राज मेहरोत्रा, डॉ. आनंद आखिला, डॉ. स्वाति वेडेकर को सम्मानित किया। इसके अलावा सभी अध्यापकों को प्रमाण पत्र वितरित किए।