हमीरपुर। कचरा ट्रीटमेंट प्लांट में कचरे के मानकों के अनुरूप निपटारण न होने से और गीले और सूखे कचरे पृथक्करण में खामियों के चलते नगर निगम हमीरपुर स्वच्छता सर्वेक्षण में फिसड्डी साबित हुआ है।
स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 शहरी विभाग की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में वर्ष 2023-24 के मुकाबले नगर निगम इस बार नौवें स्थान से 48वें स्थान पर सीधे 39 पायदान पीछे लुढ़क गया है। सर्वे में रैंकिंग में गिरावट से यहां पर स्वच्छता को लेकर किए गए दावे हवा साबित हुए हैं। निगम की ओर से प्रत्येक वर्ष शहर के सौंदर्यीकरण से लेकर साफ सफाई तक लाखों रुपये का बजट खर्च किया जाता है। वहीं, रैंकिंग वार्षिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर प्रदान की गई है।
रिपोर्ट में सर्वे टीम ने डंपसाइट से लेकर गीले व सूखे कचरे के पृथक्करण, प्राकृतिक जल स्रोतों में साफ-सफाई, घर-घर कचरा एकत्रीकरण, सार्वजनिक शौचालयों की साफ-सफाई सहित अन्य क्षेत्रों का सर्वे किया। इसके बाद रैंकिग मिली है।
सर्वे रिपोर्ट में निगम को डंप साइटों पर कचरे के निपटारण में शून्य फीसदी, गीले व सूखे कचरे के पृथक्करण में 7 फीसदी, प्राकृतिक जल स्रोतों में साफ सफाई में 33 फीसदी, घर-घर कचरा एकत्रीकरण में 55 फीसदी, सार्वजनिक शौचालयों की साफ-सफाई में 50 फीसदी, अपशिष्ट पदार्थों से उत्पाद निर्माण में 57 फीसदी, बाजार में सफाई के लिए 75 फीसदी और आवासीय स्थानों में साफ-सफाई के लिए 100 फीसदी अंक मिले हैं।
सबसे कम अंक कचरा ट्रीटमेंट प्लांट में कचरे के निपटारण को लेकर मिले है। लंबे समय से दुगनेड़ी में स्थित डंपिंग साइट पर कचरे के ढेर लगे हुए हैं। कचरे का उचित निपटारण नहीं हो पा रहा है। ऐसे में सर्वे रिपोर्ट में रैकिंग कम हुई है। स्वच्छता सर्वेक्षण का उद्देश्य शहरों को उनकी स्वच्छता के आधार पर रैंकिंग देना है। यह सर्वेक्षण स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) का हिस्सा है और इसका मुख्य उद्देश्य शहरों में स्वच्छता के स्तर में सुधार करना और नागरिकों को स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण प्रदान करना है।
कोट
रैकिंग को सुधारने के लिए रणनीति बनाई जाएगी। जिन स्थानों पर निगम को रैंकिंग कम मिली है। उसके लिए प्लान तैयार किया जाएगा, जिससे आगामी सर्वे रिपोर्ट में निगम को अच्छा रैंक मिल सके।
-राम प्रसाद, अतिरिक्त आयुक्त, नगर निगम, हमीरपुर