हमीरपुर। सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं के अभाव से अल्ट्रासाउंड के लिए लंबी तारीख मिल रही है। रेडियोलॉजिस्ट की कमी के चलते गर्भवती महिलाएं निजी स्वास्थ्य संस्थानों में अल्ट्रासाउंड करवाने को विवश हैं।
सरकारी अस्पतालों के मुकाबले निजी स्वास्थ्य संस्थानों में तीन गुणा अल्ट्रासाउंड हो रहे हैं। पिछले एक साल के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बता रहे हैं। वर्ष 2025 में जिले में गर्भवती महिलाओं के 25,432 अल्ट्रासाउंड हुए हैं। इनमें 19,891 निजी स्वास्थ्य संस्थानों में और 5541 अल्ट्रासाउंड सरकारी अस्पतालों में हुए हैं।
जिले में 15 निजी स्वास्थ्य संस्थानों और सात सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड करवाने की सुविधा है। जहां सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड निशुल्क होते हैं, वहीं, महिलाओं को निजी अस्पतालों में 1000 रुपये से 2000 रुपये की राशि खर्च करनी पड़ रही है।
सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का टोटा हमेशा रहता है। कहीं अल्ट्रासाउंड मशीन खराब हो जाती है, तो कहीं रेडियोलॉजिस्ट की सेवाएं नहीं मिल पाती हैं। चिकित्सकों की ओर से गर्भवती महिलाओं को तीसरे, पांचवें और नौवें महीने में अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह दी जाती है।
सरकारी अस्पतालों में अधिक दबाव होने के कारण अधिकतर महिलाओं को अल्ट्रसाउंड करवाने के लिए पांच से दस दिन बाद की तिथि दी जाती है, जिस कारण गर्भवती महिलाओं की परेशानी बढ़ जाती है। सरकारी अस्पतालों में महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए लंबी पंक्तियों में लगना पड़ता है। वहीं, निजी अस्पतालों में आसानी से अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिलती है।
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2024 में भी निजी अस्पतालों में अधिक अल्ट्रासाउंड
वर्ष 2024 में भी निजी अस्पतालों में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के मुकाबले अधिक अल्ट्रासाउंड हुए थे। सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के 6178 अल्ट्रासाउंड हुए थे, जबकि निजी स्वास्थ्य संस्थानों में यह आंकड़ा करीब 19,767 था। वर्ष 2025 में भी स्वास्थ्य संस्थानों की संख्या में अधिक सुधार नहीं हुआ है।
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सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती महिलाओं को बेहतर सुविधाएं दी जाती हैं। 2025 में जिले में गर्भवती महिलाओं के 25,432 अल्ट्रासाउंड हुए हैं। इनमें 19,891 निजी स्वास्थ्य संस्थानों में और 5541 सरकारी संस्थानों में हुए हैं।
-डॉ. प्रवीण चौधरी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, हमीरपुर