हमीरपुर। जिला में संचालित पशु अस्पतालों और डिस्पेंसरियों के पास के खुद के भवन नहीं हैं। इससे न केवल पशुओं का इलाज प्रभावित हो रहा है, बल्कि अस्पताल निर्धारित समय तक खुलने में दिक्कत आती है।
ऐसी स्थिति में गंभीर बीमारी से पीड़ित पशुओं का प्राइवेट डॉक्टर को घर बुलाकर इलाज करवाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। जिला में दो पशु अस्पताल और 31 डिस्पेंसरियों का संचालन अन्य भवनों से हो रहा है। हालांकि जिला में 12 पशु अस्पताल हैं, जिनमें दस के तो अपने भवन हैं। वहीं, दो पशु अस्पतालों के भवन का निर्माण कार्य जारी है। वहीं, 225 डिस्पेंसरियां हैं, जिनमे 31 के अपने भवन नहीं हैं। वे पंचायत घर, सामुदायिक भवनों सहित अन्य में संचालित हो रही हैं। खुद का भवन न होने से दवाइयां रखने, रिकार्डों को संभालने सहित अन्य दिक्कतें आती हैं। वहीं, पशुओं का इलाज भी प्रभावित होता है।
कई डिस्पेंसरियों को भवन निर्माण के लिए जमीन नहीं मिल रही हैं। वहीं, कई डिस्पेंसरियों का निर्माण जमीन विवाद के कारण नहीं हो पा रहा है। पशुपालन विभाग हमीरपुर के सहायक निदेशक परियोजना डॉ. सतीश वर्मा ने कहा कि दो अस्पतालों के भवन का निर्माण कार्य जारी है। जल्द ही निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा और पशु अस्पतालों को अपना भवन मिल जाएगा। कुछ डिस्पेंसरियां भी अन्य भवनों से संचालित हो रही हैं, लेकिन पशुओं के इलाज में कोई दिक्कत नहीं है। पशुपालकों को बेहतर सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। पशुओं का नियमित रूप से टीकाकरण किया जा रहा है।