हमीरपुर। टिब्बी पंचायत के नखरेड़ सौंरा कस्बे की मंजू शर्मा ने मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने घर से ही सिलाई का काम शुरू कर आर्थिक रूप से सशक्त महिला के रूप में अपनी पहचान बनाई है।
मंजू शर्मा एक साधारण गृहिणी हैं। उनका जीवन भी अन्य ग्रामीण महिलाओं की तरह घर-गृहस्थी, बच्चों की देखभाल और सीमित आय में परिवार को संभालने तक ही सिमटा हुआ था। पति ज्योतिष का कार्य करते हैं, जिससे आमदनी स्थिर नहीं थी। ऐसे में दो बेटियों की पढ़ाई, घर के खर्च और भविष्य की चिंता हमेशा बनी रहती थी। बढ़ती महंगाई और सीमित आय ने मंजू शर्मा को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कुछ ऐसा किया जाए, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिल सके।
परिवार के सदस्यों के साथ सलाह करके मंजू शर्मा ने अपने घर से ही सिलाई का काम शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने केवल महिलाओं और बच्चों के कपड़ों की सिलाई की। शुरुआती दौर में ग्राहक कम थे और आमदनी भी सीमित थी, लेकिन उनकी सिलाई की सफाई, नाप-जोख की सटीकता और समय पर कपड़े तैयार करने की आदत ने धीरे-धीरे लोगों का भरोसा जीत लिया।
आज स्थिति यह है कि वह हर माह सिलाई के माध्यम से हजारों रुपये की आमदनी कर रही हैं। यह आमदनी परिवार के लिए बड़ा सहारा बनी है। इससे घर के रोजमर्रा के खर्च, बेटियों की पढ़ाई, किताबें, स्कूल फीस और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। मंजू शर्मा की दो बेटियां स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं। वह चाहती हैं कि उनकी बेटियां अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और अपने पैरों पर खड़ी हों।
सिलाई से होने वाली आमदनी का बड़ा हिस्सा बेटियों की पढ़ाई पर खर्च किया जा रहा है। खास बात यह है कि बेटियां भी स्कूल की पढ़ाई के साथ-साथ मां के काम में हाथ बंटाती हैं, जिससे उनमें भी आत्मनिर्भर बनने की भावना विकसित हो रही है।