सामुदायिक केंद्रों में निपटाया जा रहा कामकाज
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। गांवों में मिनी सरकार बनाकर ग्रामीणों को सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली ग्राम पंचायत भवन तो दूर जमीन के लिए तरस रही हैं। जिले में वर्षों पूर्व गठित तीन पंचायतों को अपने भवन निर्माण के लिए जमीन नहीं मिल रही है। जबकि छह पंचायतों को अपने भवन निर्माण के लिए जमीन मिल गई हैं। इन पंचायतों के भवन का निर्माण कार्य अभी जारी है। पंचायतों के गठन होने के बाद लोगों को उम्मीद जगी थी कि उनका गांव विकास में गति पकड़ेगा, लेकिन ग्रामीणों की उम्मीद पर सरकारी सिस्टम भारी पड़ता नजर आ रहा है। पंचायतों के चुनाव के उपरांत इन ग्राम पंचायतों को खुद का भवन नहीं मिला है। इन पंचायतों का सामुदायिक केंद्र सहित अन्य भवनों में अस्थायी तौर पर कामकाज का संचालन हो रहा है। ग्राम पंचायतों के भवनों के निर्माण में हो रही देरी से विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। जिले में पंचायतों की संख्या 248 है। जिन तीन ग्राम पंचायतों को पंचायत भवन निर्माण के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं हो रही है, उनमें खैरी, महल और अमरोह शामिल हैं। ये पंचायतें लंबे समय से पंचायत भवन निर्माण के लिए जमीन तलाश रही हैं।
जिले की छह ग्राम पंचायतों को जल्द अपना भवन मिलेगा। इन पंचायतों के भवन का निर्माण कार्य प्रगति पर है। पहले पंचायत भवन निर्माण के लिए 33 लाख रुपये दिए जाते थे लेकिन अब एक पंचायत भवन निर्माण के लिए 1.14 करोड़ रुपये मिलते हैं। यह राशि बीते वर्ष से बढ़ाई गई है।
जिला पंचायत अधिकारी शशि बाला ने कहा कि तीन ग्राम पंचायतों के भवन निर्माण के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। कुछ ग्राम पंचायतों के भवनों का निर्माण कार्य अभी जारी है। अब एक पंचायत भवन निर्माण के लिए एक करोड़ 14 लाख रुपये की राशि उपलब्ध करवाई जाती है।