हमीरपुर। दो वर्ष बाद भी सरकारी स्कूलों में आपदा के जख्म नहीं भर पाए हैं। बरसात में भारी बारिश और भूस्खलन के मामलों ने स्कूल प्रमुखों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। दो बार एस्टीमेट भेजने के बाद भी 66 उच्च व वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों को मरम्मत व रखरखाव कार्य के लिए बजट नहीं मिल पाया है।
इससे अब स्कूलों में शिक्षकों व विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रभावित स्कूलों में सुरक्षा दीवारें, खेल मैदान, रसोईघर, शौचालयों सहित कक्षाओं के कमरे क्षतिग्रस्त हुए थे, जिससे शिक्षा विभाग को 2.35 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
हालांकि, एक दर्जन स्कूल प्रमुखों ने पंचायतों के माध्यम से स्कूल भवनों की मरम्मत करवा दी है, लेकिन अन्य स्कूलों में नुकसान अधिक होने के कारण स्कूल प्रमुख कार्य नहीं करवा पाए हैं। अभिभावकों का कहना है कि प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से शैक्षणिक सत्र में स्कूलों में आपदा प्रबंधन का प्लान प्रदर्शित करने और विद्यार्थियों को सुरक्षा का पाठ पढ़ाने के बारे में निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन धरातल पर विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर कोई भी कार्य नहीं हो रहा है। इससे विद्यार्थी खतरे के साय में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
स्कूलों में खेल मैदान, चहारदीवारी, संपर्क रास्ते और भवन ही विद्यार्थियों को सुरक्षित माहौल प्रदान करते हैं। मरम्मत कार्य के लिए दो वर्षों के बाद भी बजट जारी न होना विभागीय कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिह्न लगा रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार से समस्या का समाधान करने की मांग की है।
कोट
आपदा से प्रभावित स्कूलों का एस्टीमेट बनाकर निदेशालय भेजा गया है, लेकिन अभी तक स्कूलों को कोई भी बजट जारी नहीं हुआ है। विद्यार्थियों को सुरक्षित कमरों में पढ़ाई करवाई जा रही है। बजट जारी होने के बाद मरम्मत कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
-डॉ. एमआर चौहान, उपनिदेशक, उच्च शिक्षा विभाग, हमीरपुर
बरसात के कारण गिरी डिडवीं स्कूल की सुरक्षा दीवार। संवाद
बरसात के कारण गिरी डिडवीं स्कूल की सुरक्षा दीवार। संवाद