हमीरपुर। हजारों यात्रियों को रोज मंजिल तक पहुंचाने वाली एचआरटीसी की बसें खुद मरम्मत की राह देख रही हैं। हमीरपुर डिपो की कई बसों के फटे सीट कवर, क्षतिग्रस्त शीशे और उखड़ी टायर रिमोल्डिंग यात्रियों की सुविधा ही नहीं, उनकी सुरक्षा पर भी सवालिया निशान लगा रही है।
कई बसों की सीटों से फोम बाहर निकल आया है और लंबी दूरी का सफर यात्रियों के लिए असहज बन गया है। यात्रियों का कहना है कि बसों के रखरखाव पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा। कई बसों के आगे लगे शीशों में दरारें साफ दिखाई देती हैं। क्षतिग्रस्त फ्रंट शीशे चालक की दृश्यता प्रभावित कर सकते हैं। इससे दुर्घटना का जोखिम भी जाता है। कुछ बसों के टायरों पर चढ़ाई गई रिमोल्डिंग रबड़ भी कई जगह से उखड़ चुकी है। बरसात के मौसम में ऐसे टायर कभी भी हादसे को न्योता दे सकते हैं। यात्रियों का मानना है कि छोटी-छोटी खामियों को समय रहते दूर न किया जाए तो यही आगे चलकर बड़े हादसों की वजह बन सकती हैं। यात्रियों रमन, अंकुश और सुमन सहित अन्य ने कहा कि निगम को बसों की नियमित तकनीकी जांच के साथ-साथ फटे सीट कवर बदलने, क्षतिग्रस्त शीशों को तुरंत बदलने और खराब टायरों की जगह नए टायर लगाने चाहिए। उनका कहना है कि सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा और आराम दोनों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
बसों की मौजूदा स्थिति रखरखाव व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। कहीं सीटों से फोम बाहर झांक रहा है तो कहीं फ्रंट शीशे पर दरारें नजर आ रही हैं। कुछ टायरों की रिमोल्डिंग रबड़ उखड़ने से उनकी स्थिति भी चिंताजनक है।
यात्रियों की सुरक्षा निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बसों की समय-समय पर तकनीकी जांच करवाई जाती है और आवश्यक मरम्मत भी कराई जाती है।
- राहुल कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक, एचआरटीसी हमीरपुर डिपो
हमीरपुर डिपो के बेड़े में शामिल हैं 133 बसें
एचआरटीसी हमीरपुर डिपो के बेड़े में करीब 133 बसें शामिल हैं। ये बसें करीब 168 रूटों पर सेवाएं दे रही हैं। कभी दस 10 लाख किलोमीटर तो कभी 13 लाख किलोमीटर चलने के बाद बसों को कंडम घोषित करने की बात की जाती है। हालांकि हमीरपुर डिपो में कई ऐसी बसें हैं जो निर्धारित किलोमीटर का सफर तय कर चुकी हैं। उसके बाद भी इनका उपयोग किया जा रहा है।