बाल स्कूल हमीरपुर का पुराना गेट। संवाद
हमीरपुर। सरकारी रिकॉर्ड में स्कूल का नाम बदल चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्था अब भी पुरानी दिखाई दे रही है। हमीरपुर के स्कूल के मुख्य द्वार पर पुराना बोर्ड लगा होने से विद्यार्थियों और अभिभावकों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
सह-शिक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने फरवरी माह में राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय को बाल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में मर्ज करने का निर्णय लिया था। इसके बाद शिक्षा विभाग ने सह-शिक्षा प्रणाली लागू करने संबंधी अधिसूचना जारी की और वार्षिक परीक्षाओं के बाद कन्या विद्यालय की छात्राओं के दाखिले भी बाल विद्यालय में कर दिए गए।
विभागीय दस्तावेजों, ऑनलाइन रिकॉर्ड, पत्राचार और अन्य प्रशासनिक कागजात में स्कूल को सह-शिक्षा विद्यालय के रूप में दर्ज किया जा चुका है। इसके बावजूद स्कूल के मुख्य द्वार पर अब भी पुराना बोर्ड लगा हुआ है, जिस पर “बलिदानी कैप्टन मृदुल शर्मा स्मारक राजकीय बाल वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हमीरपुर” लिखा है।
स्कूल के मुख्य गेट पर नाम नहीं बदले जाने से विद्यार्थियों और अभिभावकों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब विभागीय रिकॉर्ड में बदलाव हो चुका है, तो स्कूल परिसर में भी नई व्यवस्था के अनुरूप नाम प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
इस मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और समन्वय पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोट
स्कूल प्रबंधन को इस संदर्भ में निर्देश दिए जाएंगे। जल्द ही स्कूल के मुख्य द्वार पर नया बोर्ड लगाया जाएगा और सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी।
-राजेश भाटिया, कार्यकारी उपनिदेशक, उच्च शिक्षा विभाग हमीरपुर