भोटा (हमीरपुर)। चैरिटेबल अस्पताल भोटा के संचालन को लेकर उपजे संशय से लोग बेहद हताश है। यही वजह है कि सोमवार को प्रदर्शन के बाद बुधवार को दोबारा लोग सड़कों पर उतर आए।
लोगों का स्पष्ट कहना है कि ब्यास प्रबंधन की मांग को जल्द सरकार पूरा करे और इस विषय पर लिखकर दे। लोगों ने सरकार को चेताया है कि जब तक सरकार मसले को नहीं सलुझाएगी, वह धरने पर हर दिन बैठेंगे। ऐसे में अब मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस कड़ी में वीरवार को अस्पताल के बाहर बुधवार को पांच घंटे तक लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में अधिकतर महिलाएं मौजूद रहीं। दो बसों में पुलिस बल लोगों को शांत करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर तैनात रहा। इस दौरान कई बार माहौल तनावपूर्ण हो गया। हालांकि पुलिस कर्मचारियों ने सहज तरीके से लोगों से यातायात को बहाल करने आग्रह किया।
इस दौरान गहमागहमी भी देखने को मिली। मोरसू सुल्तानी प्रधान रचना देवी, नगर पंचायत भोटा प्रधान सपना सोनी, अग्घार पंचायत प्रधान कमलेश कुमारी , पाहलू पंचायत केसर सिंह सहित सैकड़ों लोग धरने में मौजूद रहे। जन प्रतिनिधियों का कहना है कि भोटा अस्पताल का संचालन हर सूरत में होना चाहिए। जमीन के मालिकाना हक के हस्तातंरण में यदि कानून आड़े आ रहा है, तो सरकार उसका हल करे।
निशुल्क सेवाएं देने वालों पर गाज गिराना निंदनीय : आशीष
विधायक आशीष शर्मा ने कहा कि अस्पताल के बंद होने का समाचार दुर्भाग्यपूर्ण है। इस संबंध में अस्पताल प्रशासन से मुलाकत की एवं धरने पर बैठे स्थानीय लोगों को अपना साथ व समर्थन भी दिया है। उन्होंने कहा कि जनहित में चल रहे ऐसे संस्थान जो लोगों को निशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाते हैं, उन पर गाज गिराना और उन्हें तालाबंदी की ओर ले जाना सरकार का निंदनीय निर्णय है। प्रदेश सरकार व मुख्यमंत्री से विनम्र निवेदन है कि समस्त जिलावासियों व आसपास के जिलों के लोगों के हित को ध्यान में रखते हुए संस्था को राहत प्रदान की जाए और जनहित में इस अस्पताल को बंद होने से बचाया जाए, ताकि लोगों को मिल रही बेहतर एवं निशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती रहें। अस्पताल के बाहर अस्पताल को बंद करने के लिए बोर्ड लगाने की नौबत क्यों आई है। कांग्रेस सरकार में जब तक लोग सडकों में न आए तब तक मुख्यमंत्री कुछ नहीं करेंगे। मुख्यमत्री सुक्खू अगर लिख कर दो लाइन ब्यास प्रबंधन को दे देती कि आगामी सत्र में संशोधन किया जाएगा तो अस्तपाल बंद होने से बच जाएगा। विधायक बड़सर इद्रदत लखनपाल ने कहा कि भोटा चैरिटेबल अस्पताल को बंद करने के चलते लोग अब सडकों पर उतरे हैं और मुख्यमत्री को चाहिए कि चैरिटेबल अस्पताल के लिए जमीन के विवाद को सुलझाया जाए।
कोट्स
रविन्द्र खन्ना ने कहा कि सरकार के मौखिक बात पर विश्वास नहीं है और लिखित तौर पर लिखकर दिया जाए कि मांगों को पूरा किया जाएगा। मांग नहीं मानी जाती है तो दोनों गेट पर पहली दिसंबर को लोग बैठ जाएंगे और सामान को और स्टाफ को नहीं ले जाने देंगे।
विचित्र सिंह का कहना है कि दो दशकों से अस्पताल में निशुल्क सेवाएं मिल रही हैं। ऐसे में इस अस्पताल को किसी भी कीमत पर बंद नहीं होने देंगे।
कश्मीरी लाल का कहना है कि यह अस्पताल गरीबों का सहारा है। इस अस्पताल का संचालन होता रहे, इसके लिए सरकार जल्द से जल्द कदम उठाए।
केसरी देवी का कहना है कि वह बुजूर्ग है। अकेले अस्पताल में उपचार के लिए आ जाती है तो भी कोई दिक्कत नहीं आती है। यह उनका बड़ा सहारा है।
नीलम डोगरा ने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, वह हर दिन प्रदर्शन के लिए आएंगी। यह अस्पताल क्षेत्र के लोगों की जीवनरेखा है, इसे हरगिज बंद नहीं होने देंगे।
कृष्णी देवी ने कहा कि सरकार आखिर ब्यास प्रबंधन को लिखित आश्वासन देने में गुरेज क्यों कर रही है। जब सरकार लिखकर दे देगी तो वह प्रदर्शन से हटेंगे।
रविंद्र खन्ना
रविंद्र खन्ना
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