हमीरपुर। जिले में कृषि कार्यों के लिए लाया करीब 15 लाख रुपये का ड्रोन उड़ान नहीं भर पाया। एक साल से ड्रोन का उपयोग नहीं होने के कारण अब इसे जिला ऊना भेजा गया है।
यहां पर ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है। इफको ने किसानों को ड्रोन की सुविधा दी थी। शुरुआत में इसका उपयोग केवल कुछ किसानों के खेतों में घास पर नैनो फर्टिलाइजर के छिड़काव के लिए किया गया। इसके बाद इसका नियमित उपयोग नहीं हो सका।
एक साल तक ड्रोन का संचालन नहीं हुआ। उपयोग न होने के पीछे कारण किसानों में जागरूकता की कमी और जिले में छोटे-छोटे खेत और पेड़ों की अधिकता को बताया जा रहा है। छोटे-छोटे खेत और खेतों के आसपास बड़े पेड़ ड्रोन संचालन में बड़ी बाधा बन रहे थे। इसी कारण ड्रोन का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल संभव नहीं हो पाया।
एक उद्यमी ड्रोन का संचालन जिला में कर रहा था। एक कनाल पर करीब 100 से 150 रुपये फर्टिलाइजर के छिड़काव पर कमा रहा था, लेकिन मांग लगातार कम होने और फिर शून्य हो जाने के चलते इस उद्यमी ने यह कार्य बंद कर दिया। स्थिति को देखते हुए इफको ने इस ड्रोन को मजबूरन जिला ऊना में भेज दिया।
ऊना में बड़े खेत होने के कारण इसके उपयोग की संभावना अधिक बताई जा रही है। गौरतलब है कि किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और नैनो फर्टिलाइजर के छिड़काव को आसान बनाने के उद्देश्य से यह ड्रोन मंगवाया गया था। स्थानीय परिस्थितियों के कारण यह योजना यहां सफल नहीं हो सकी।
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नैनो फर्टिलाइजर के छिड़काव में ड्रोन का कम उपयोग हो रहा था। इसे अब ऊना भेज दिया गया है।
-पवन कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी इफको, हमीरपुर