हमीरपुर। मजबूत हौसले व कुछ अलग करने की चाह में बकारटी की सीमा न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार देने का कार्य कर रही है। 15 वर्ष पूर्व उन्होंने शौक के तौर पर बांस और पत्थरों से कलाकृतियां, प्लास्टिक के लिफाफों से फूटमैट, पर्स, ज्वेलरी और जूट के बैग बनाने का कार्य शुरू किया।
धीरे-धीरे निजी कंपनियों के माध्यम से स्कूल, कॉलेजों में विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने के लिए जाने लगीं। इससे उन्हें प्रत्येक माह आठ से नौ हजार रुपये की आय होती थी, लेकिन स्कूलों में अवकाश के दौरान आय का स्थाई साधन न होने से उन्होंने निजी तौर पर कार्य शुरू करने का निर्णय लिया और डेढ़ वर्ष पूर्व स्वयं सहायता समूह के साथ जुड़कर अपनी हमीर क्रिएशन एंजेसी खोली।
एजेंसी खोलने के बाद विभिन्न प्रशिक्षण शिविरों के लिए निजी कंपनियों के माध्यम से कुटेशन लेना शुरू किए, जिससे अब वह स्वयं बतौर संसाधन व्यक्ति और एजेंसी के माध्यम से प्रशिक्षकों को शिविरों के लिए भेज रही हैं। प्रशिक्षकों को मांग के अनुसार शिविरों में भेजा जाता है। इससे उन्हें भी प्रत्येक माह 8 से 10 हजार रुपये की आय हो जाती है।
प्रशिक्षक शिविरों में जूट के बैग, अचार, चटनी, चीड़ की पत्तियों से उत्पाद, बांस की कलाकृत्तियां, कचरे से उपयोगी वस्तुएं बनाने का प्रशिक्षण देते हैं। सीमा अभी तक चंबा, कांगड़ा, सोलन, पंजाब सहित अन्य राज्यों में महिलाओं व बच्चों को स्वदेशी वस्तुओं से उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दे चुकी हैं।
प्रशिक्षणों के माध्यम से अब उन्हें प्रतिमाह 40 से 50 हजार रुपये की आय हो रही है। सीमा के पति निजी कंपनी में कार्यरत हैं, जबकि बेटा नौंवीं कक्षा में पड़ता है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार के सदस्यों को दिया है।
सीमा।
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