ताल (हमीरपुर)। देश की सीमाओं पर दुश्मनों से लोहा लेने वाले पूर्व सैनिकों का गांव आजादी के दशकों बाद भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से महरूम है। ग्राम पंचायत साहन्वी के बढ़ार गांव तक आज भी सड़क नहीं पहुंच पाई है।
करीब 20 परिवारों की आबादी वाले इस गांव के ग्रामीण करीब डेढ़ किलोमीटर के तंग और बदहाल पैदल रास्ते के सहारे जीवनयापन कर रहे हैं। किसी बुजुर्ग या बीमार की तबीयत बिगड़ने पर उसे कंधों या चारपाई के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। बरसात में रास्ता और भी जोखिमभरा हो जाता है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के अधिकांश युवा रोजगार के लिए शहरों का रुख कर चुके हैं, जबकि बुजुर्ग और बच्चे अधिक संख्या में गांव में रह गए हैं। ऐसे में आपात स्थिति में बीमार या बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है।
बारिश के दौरान फिसलन और कीचड़ से परेशानी बढ़ जाती है और ग्रामीणों को डंडों के सहारे रास्ता पार करना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण की मांग कई बार स्थानीय विधायक और संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाई जा चुकी है।
वर्ष 2023 में सड़क निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजा गया था, लेकिन अब तक धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ। ग्रामीण सड़क निर्माण के लिए अपनी जमीन देने की सहमति भी जता चुके हैं।
स्थानीय निवासी कर्नल प्रदीप कुमार, जो ऑपरेशन सिंदूर में भी सेवाएं दे चुके हैं, ने कहा कि गांव के करीब सात पूर्व सैनिकों ने देश की सुरक्षा के लिए अपना कर्तव्य निभाया है। सीमा पर कठिन परिस्थितियों का सामना करने वाले सैनिकों को आज अपने ही गांव तक पहुंचने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
उन्होंने सरकार से बढ़ार गांव की सड़क को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृत कर निर्माण शुरू करने की मांग की।
कोट
ग्रामीण उनके साथ पत्राचार करें, ताकि समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
-दीपक कपिल, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग मंडल हमीरपुर
ग्राम पंचायत साहन्वीं के गांव बढ़ार के लोग बुजुर्ग को पकड़कर मुख्य सडक तक ले जाते हुए। संवाद
ग्राम पंचायत साहन्वीं के गांव बढ़ार के लोग बुजुर्ग को पकड़कर मुख्य सडक तक ले जाते हुए। संवाद
ग्राम पंचायत साहन्वीं के गांव बढ़ार के लोग बुजुर्ग को पकड़कर मुख्य सडक तक ले जाते हुए। संवाद