शिक्षा विभाग में ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटरों की वजह से स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बीते साल ही प्राइमरी और अपर प्राइमरी में नए सिरे से बीआरसी की तैनाती हुई है। लेकिन जिन स्कूलों में सेवारत अध्यापकों को बीआरसी नियुक्त किया है, उन्हें वेतन उन्हीं स्कूलों से मिल रहा है।
बीआरसी के पद पर तैनात होने के बाद संबंधित स्कूल में उस अध्यापक का पद खाली रहता है। संबंधित स्कूल में अध्यापक का खाली पद भरने के बाद कहीं दूसरे स्कूल की तलाश शुरू हो जाती है। वर्तमान में जिला मुख्यालय में चल रहे अन्य स्कूल जहां पर अध्यापक का पद खाली चल रहा है, वहां से बीआरसी का वेतन दिलवाया जा रहा है।
बीआरसी के वेतन के लिए स्कूलों में अध्यापक का पद खाली रहना अनिवार्य है, अगर पद भर गया तो वेतन नहीं मिलेगा। प्रतीत होता है कि शिक्षा विभाग जानबूझकर स्कूलों में अध्यापकों के खाली पद नहीं भरना चाहता।
दिक्कत यह है कि बीआरसी के वेतन के चक्कर में अध्यापक का पद खाली रहने से स्कूली बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अभिभावक सुनील शर्मा, विनोद पंडित, सुरेश ठाकुर, वीरेंद्र ठाकुर, सुनील कुमार और प्यारे लाल ने शिक्षा विभाग से बीआरसी की तैनाती के बाद खाली चल रहे अध्यापकों के पदों को भरने और बीआरसी के लिए अलग से वेतन की व्यवस्था करने की मांग की है।
प्राइमरी स्कूलों में बीआरसी के लिए अलग से वेतन की व्यवस्था शिक्षा विभाग ने कर दी है। हालांकि, अपर प्राइमरी में वेतन की व्यवस्था अभी तक नहीं हो पाई है। बीआरसी का वेतन किसी स्कूल में खाली चल रहे अध्यापक के पद से निकाला जाता है। यह मामला शिक्षा विभाग के ध्यान में है।
- इंद्रजीत सिंह, उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा विभाग, हमीरपुर