हमीरपुर। स्वास्थ्य विभाग सीवाई-टीबी टीकों की कमी से जूझ रहा है। आवश्यक्ता के मुताबिक टीके नहीं आने के कारण टीबी मरीजों की जांच प्रभावित हो रही है।
स्वास्थ्य खंड भोरंज और टौणी देवी में एक्सरे स्क्रीनिंग में टीबी लक्षण वाले मरीजों की सीवाई टीबी टीकों से जांच हो रही है। वहीं, अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में भी सीवाई-टीबी टीकों का प्रयोग किया जाता है, लेकिन कम संख्या में टीकों की खेप आने से जांच प्रक्रिया में लंबा समय लग रहा है।
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी मरीजों की पहचान के लिए सीवाई-टीबी टीकाकरण किया जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से लैब तकनीशियन और स्टाफ नर्सों को प्रशिक्षित किया है।
इस टीकाकरण की खासियत यह है कि इससे टीबी मरीजों की सटीकता के साथ पुष्टि होती है। यह टीका विशेष तौर पर रोगी के संपर्क में रहने वाले लोगों को लगाया जाता है। इससे टीबी से पीड़ित मरीजों के परिजनों और नजदीकी रिश्तेदारों के टीबी ग्रसित होने के शुरुआती समय में जानकारी प्राप्त की जाती है।
मरीजों के शरीर में टीबी कीटाणु उपलब्ध होने की पहचान होने पर आवश्यक उपचार की सुविधा दी जाती है। इस साल अब तक 300 लोगों में टीबी का संक्रमण पाया गया है।
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ऐसे की जाती है जांच
यह एक त्वचा टेस्ट है। 18 वर्ष से अधिक के आशंका वाले लोगों के हाथ पर सीरिंज के माध्यम से त्वचा के नीचे दवाई लगाई जाती है। 48-72 घंटे के बाद इसका रिजल्ट लिया जाता है। इस जांच को टीबी संक्रमण का पता लगाने का सबसे ज्यादा सटीक तरीका माना जाता है।
कोट
सीवाई-टीबी टीकों की कमी है। स्वास्थ्य विभाग दिल्ली से टीकों की खेप कम आ रही है। जितने टीके आ रहे हैं, उनका प्रयोग किया जा रहा है।
-सुनील वर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी