राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में सीवरेज चैंबरों की लीकेज की संस्थान प्रबंधन ने मरम्मत कर दी है। 15 फरवरी को ‘अमर उजाला’ में एनआईटी के सीवरेज चैंबर लीक, नाले में बह रही गंदगी समाचार प्रकाशित होने के बाद संस्थान प्रबंधन हरकत में आया है। सीवरेज चैंबरों की मरम्मत के बाद क्षेत्र के करीब ढाई दर्जन गांवों के बाशिंदों ने राहत की सांस ली है।
लोगों में पंचायत प्रधान गुरदेव जगोता, उपप्रधान तारा चंद, कृष्ण कुमार, प्रेम चंद, सुरजीत सिंह, सुदेश कुमार, राम रत्न, ओम प्रकाश, ओमदत्त, अश्वनी कुमार, संजीव कुमार, रेखा देवी, वीना देवी, मीना, सुमना और मंगलेश आदि का कहना है कि आईपीएच विभाग और एनआईटी प्रबंधन को समस्या के बारे में कई बार अवगत करवाया था, लेकिन दोनों एक दूसरे को जिम्मेवार बता जिम्मेवारी से पल्ला झाड़ रहे थे।
उन्होंने बताया कि बीते छह माह से क्षेत्रवासी समस्या को लेकर एनआईटी प्रबंधन और आईपीएच कार्यालय के चक्कर काट रहे थे, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा था। अमर उजाला टीम ने मौके का जायजा लिया तो सीवरेज चैंबर लीक थे। चैंबरों के ढक्कन खुले पड़े थे और सीवरेज का पानी नाले में मिल रहा था।
इससे नाले के से लगते करीब एक दर्जन प्राकृतिक पेयजल स्रोत दूषित हो रहे थे। खुले में कचरे को फेंककर जलाया जा रहा था। अमर उजाला ने समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इस पर संस्थान प्रबंधन ने मौके पर पहुंचकर समस्या का जायजा लिया। एनआईटी के डायरेक्टर ने समस्या के जल्द समाधान के आदेश दिए।
अब सीवरेज चैंबरों कर मरम्मत कर दी गई है। कचरे के निपटारे को गड्ढे बनाए गए हैं। गड्ढे से बाहर कचरा फेंकने पर कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। खुले में गिरे कचरे को भी मिट्टी से ढक दिया गया है।
ट्रीटमेंट प्लांट की जिम्मेवारी आईपीएच के पास है। सीवरेज चैंबरों और पाइप लाइनों की जिम्मेवारी एनआईटी प्रबंधन के पास है। संस्थान प्रबंधन ने ही इसकी मरम्म्त करवाई है।
- नीरज भोगल, एक्सईएन आईपीएच, हमीरपुर