उत्तरी भारत के प्रसिद्ध सिद्धपीठ बाबा बालक नाथ मंदिर न्यास के महंत राजेंद्र गिरि और मंदिर न्यास के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए मंदिर कमिश्नर एवं उपायुक्त हमीरपुर मदन चौहान ने मंदिर के चेयरमैन और एसडीएम बड़सर अक्षय सूद को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
एसडीएम बड़सर सारे मामले की जांच कर उपायुक्त हमीरपुर को रिपोर्ट देंगे। मंदिर के महंत ने मंदिर ट्रस्ट के गठन समेत चढ़ावे पर कई सवाल उठाए थे। महंत के आरोपों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उपायुक्त हमीरपुर ने जांच का निर्णय लिया था।
भाषा एवं संस्कृति विभाग भी महंत और मंदिर न्यास के बीच चल रहे विवाद के बाद मामले की जांच की बात कह चुका है। प्रदेश सरकार के टेंपल एक्ट के मुताबिक किसी भी मंदिर ट्रस्ट कमिश्नर को पांच अनुवांशिक एवं पांच गैर अनुवांशिक और 10 शासकीय ट्रस्टी मनोनीत कर मंदिर ट्रस्ट का गठन करना होता है।
न्यास बैठक में फैसला लेने के लिए और प्रस्ताव को पारित करने के लिए न्यासियों की कुल संख्या में से दो तिहाई होना भी अनिवार्य है। प्रत्येक बैठक में तीन न्यासियों ने अनुवांशिक ट्रस्टियों की उपस्थिति होना अनिवार्य है।
प्रदेश के सभी ट्रस्ट मंदिरों का गठन टेंपल एक्ट के आधार पर हुआ है लेकिन महंत राजेंद्र गिरि ने आरोप लगाया था कि दियोटसिद्ध मंदिर ट्रस्ट का गठन नियमों के विपरीत मनमर्जी से किया गया है। उनका कहना है कि दियोटसिद्ध में 20 ट्रस्टियों में से सिर्फ दो ही ट्रस्टी अनुवांशिक मनोनीत किए हैं।
इसके चलते ट्रस्ट बैठक की कोई भी कार्रवाई अनुवांशिक ट्रस्टियों की उपस्थिति पूरी न होने से वैध नहीं मानी जा सकती है।
बाबा बालक नाथ मंदिर न्यास दियोटसिद्ध के आयुक्त एवं उपायुक्त हमीरपुर मदन चौहान ने कहा कि महंत ने मंदिर न्यास पर जो सवाल उठाए हैं, उनकी जांच के लिए मंदिर के चेयरमैन एवं एसडीएम बड़सर को निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।