हमीरपुर। सरकारी स्कूलों में संसाधनों और विकास कार्यों को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के माध्यम से निजी कंपनियां सरकारी स्कूलों के विकास में सहयोग करेंगी। इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है और स्कूल प्रमुखों को 10 दिनों के भीतर अपनी विकास संबंधी मांगों (डिमांडों) को ऑनलाइन अपलोड करना होगा।
यह पहल सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रम के तहत शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों को अधिक से अधिक संसाधन उपलब्ध कराना है। विद्यांजलि पोर्टल पर सीएसआर पहल के जरिए अब बड़ी निजी कंपनियों को स्कूलों के साथ जोड़ा जा रहा है। स्कूल प्रमुखों को अपने स्कूलों की विकास संबंधी मांगों को निर्धारित थीम के आधार पर विद्यांजलि पोर्टल पर सीएसआर पहल के तहत अपलोड करना होगा।
मांगें अपलोड होने के बाद निजी कंपनियां अपनी सीएसआर नीति के तहत इन जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों में सहयोग करेंगी। निजी कंपनियां अपनी सीएसआर राशि का 20 प्रतिशत तक स्कूलों के विकास, संसाधनों, फर्नीचर, खेलकूद गतिविधियों, शिक्षा और भवन निर्माण जैसे विभिन्न कार्यों में योगदान देंगी। इससे सरकारी स्कूलों में संसाधनों की कमी को दूर होगी और उनका उत्थान भी होगा।
पहले विद्यांजलि पोर्टल के तहत समाजसेवी और स्वयंसेवक स्कूलों से जुड़ते थे। लेकिन अब शिक्षा विभाग ने स्कूल शिक्षकों को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वे सीएसआर पहल के तहत भी विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं और निजी कंपनियों से सहयोग ले सकते हैं। वर्तमान में भी जिलाभर के कई स्कूलों में विद्यांजलि के माध्यम से समाजसेवी सहयोग कर रहे हैं। अब निजी कंपनियों के जुड़ने से विकास कार्यों को और अधिक गति मिलेगी।
स्कूलों में सीएसआर पहल के तहत निजी कंपनियों को जोड़ने का कार्य किया जा रहा है ताकि स्कूलों के विकास कार्यों में योगदान दिया जा सके। सभी शिक्षक 10 दिन के भीतर पोर्टल पर अपने स्कूलों की डिमांड अपलोड कर दें, जिससे कार्यों में सहयोग मिलना शीघ्र शुरू हो सके।
-सुनील कुमार, जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता