संवाद न्यूज एजेंसी
दियोटसिद्ध(हमीरपुर)। उत्तरी भारत के प्रसिद्ध सिद्धपीठ बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में अब रोट प्रसाद बनने के 20 दिन बाद तक ही श्रद्धालु खा सकेंगे। 20 दिन के बाद रोट प्रसाद को खाने पर पूर्णतया: पांबदी रहेगी।
मंदिर परिसर की कैंटीन में रोट सैंपल के फेल होने के बाद व्यापार मंडल ने निजी तौर पर शूलिनी विश्वविद्यालय से रोट के सैंपल टेस्ट करवाए हैं, ताकि रोट की समय अवधि का सही पता लगाया जा सके। ऐसे में अब वैज्ञानिकों की ओर से जारी रिपोर्ट में पाया गया है कि बाबा का प्रसाद रोट 20 दिनों तक खाने के योग्य होता है।
इस प्रकार अब मंदिर परिसर में दुकानदारों को रोट प्रसाद बनाने के साथ उसके ऊपर निर्माण तिथि अंकित करनी होगी, ताकि सही तौर पर रोट बनने की तिथि का पता लगाया जा सके। ढाई माह पूर्व तिरुपति बालाजी मंदिर में प्रसाद की गुणवत्ता पर विवाद के बीच खाद्य सुरक्षा विभाग हमीरपुर की ओर से दिसंबर में बाबा बालक नाथ मंदिर परिसर में रोट के सैंपल भरे गए थे।
इसमें कैंटीन में भरा गया रोट का सैंपल विभागीय मानकों पर सही नहीं पाया गया। इसके चलते विभाग की ओर से दुकानदारों के लिए मंदिर परिसर में जागरूकता शिविर लगाने के निर्देश दिए गए थे।
शिविर के बाद व्यापार मंडल दियोटसिद्ध की ओर से जनवरी में निजी तौर पर शूलिनी विश्वविद्यालय में जांच करवाई गई है। रोट में नमी एवं कैमिकल के आधार पर यह परिणाम आया है कि 20 दिन तक रोट खराब नहीं हो सकता है।
दुकानदारों में सुनील, संजय कालिया, राजीव आदि ने कहा कि जांच में रोट की समय अवधि 20 दिन तक ही सही निकली है। कैंटीन में बना रोट विभागीय मानकों पर सही नहीं निकला था, जिसके चलते दुकानदारों ने निजी तौर पर रोट की जांच करवाई है।
बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध। संवाद