एलपीजी चूल्हों के बजाय पारंपरिक ईंधन से चलने वाली भट्ठियों का ले रहे सहारा
विभाग से केरोसिन का विशेष कोटा देने की मांग, चैत्र माह मेलों के महज दो सप्ताह शेष
संवाद न्यूज एजेंसी
दियोटसिद्ध (हमीरपुर)। बाबा बालकनाथ मंदिर दियोटसिद्ध में चैत्र माह के मेलों के दौरान रोट प्रसाद विक्रेताओं को व्यावसायिक एलपीजी गैस सिलिंडरों की कमी से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गैस आपूर्ति बाधित होने के चलते विक्रेताओं को अब एलपीजी चूल्हों के बजाय पारंपरिक ईंधन से चलने वाली भट्ठियों का सहारा लेना पड़ रहा है।
रोट व्रिकेता विभाग से केरोसीन की मांग कर रहे हैं लेकिन विभाग की शर्तों के अनुसार एक पूरे टैंक की मांग होती है तभी आपूर्ति की जा सकती है । इससे कम मांग होने पर केरोसीन तेल नहीं दिया जा सकता है। एक टैंक में 24 हजार लीटर केरोसीन का तेल आता है। चैत्र माह मेलों को महज दो सप्ताह रह गए हैं। ऐसे में कब व्यापारी मांग भेजेंगे और कब तेल की आपूर्ति की जाएगी।
इन बार मेलों के दौरान सिलिंडरों की आपूर्ति न होने के कारण रोट बनाने की लागत बढ़ गई है और कीमतें पुरानी ही हैं। स्थानीय व्यापारियों सुनील कुमार, राकेश और विवेकानंद ने कहा कि गैस सिलिंडर की आपूर्ति न होने के कारण रोट बनाने की लागत में काफी बढ़ोतरी हो गई है। रोट प्रसाद तैयार करना महंगा पड़ रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। व्यापारियों ने कहा कि पहले की तरह यदि विभाग उन्हें केरोसिन उपलब्ध करवा दे तो उनकी समस्या काफी हद तक हल हो सकती है। उन्होंने मांग की है कि दियोटसिद्ध क्षेत्र के रोट प्रसाद विक्रेताओं को केरोसिन का विशेष कोटा दिया जाए ताकि मेले के दौरान सुचारू रूप से प्रसाद तैयार किया जा सके।
क्या कहते हैं लोग
व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति नहीं हो रही है। रोट बनाने की लागत बढ़ गई है। पारंपरिक ईंधन से चलने वाली भट्टियों का सहारा लेना पड़ रहा है। विवेकानंद, रोट विक्रेता
चैत्र माह मेलों को महज दो सप्ताह शेष रह गए हैं। मेलों के दौरान सिलिंडरों की कमी के कारण खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विभाग से केरोसीन की मांग की है ताकि थोड़ी राहत मिल सके। राजेश रौनकी, रोट विक्रेता
कोट:
यदि स्थानीय कारोबारी अपनी मांग को लेकर विभाग को लिखित मांग पत्र देते हैं तो उन्हें केरोसिन उपलब्ध करवाया जा सकता है। इसके लिए उपभोक्ताओं को लगभग 94 रुपये प्रति लीटर की दर से भुगतान करना होगा। -शिवराम राही, डीएफएससी हमीरपुर