संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। अप्रैल माह में शिक्षा निदेशालय की ओर से मांगी गई सरप्लस स्टाफ और कम छात्र संख्या वाले स्कूलों की सूची फाइलों में दफन हो गई है। यहां पर सरप्लस स्टाफ को एक स्टेशन से हटाने की विभागीय हसरत महज फाइलों की कसरत तक सीमित होकर रह गई है।
जिला के दो उच्च स्कूलों में औसतन तीन विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए एक-एक शिक्षक तैनात है। स्कूलों में कम छात्र होने के बाद भी विभाग की ओर से यहां से स्टाफ को अन्य जगह नहीं भेजा गया है। ऐसे में अन्य स्कूलों में कम स्टाफ होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है।
रेड जोन वाले लझियाणा स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या 22, जबकि खैरी में 21 है। स्कूलों में आठ-आठ शिक्षक छठी से दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पढ़ाई करवा रहे हैं।
उच्चत्तर शिक्षा विभाग हमीरपुर की ओर से नए शैक्षणिक सत्र के शुरू में ही दोनों स्कूलों राजकीय उच्च पाठशाला लझियाणा को पल्लवीं और खैरी को जंगलबैरी में मर्ज करने की रिपोर्ट निदेशालय को भेजी गई थी।
इसमें विद्यार्थियों की संख्या के साथ स्टाफ का ब्योरा भी दिया गया, ताकि स्टाफ को जररूत के अनुसार अन्य स्कूलों में नियुक्त किया जा सके, लेकिन डेढ़ माह का समय बीत जाने के बाद भी न तो स्कूलों को मर्ज किया गया अैर न ही सरप्लस स्टाफ को अन्य जगह नियुक्ति दी गई। ऐसे में सरकारी व्यवस्था पर अभिभावकों ने रोष व्यक्त किया है।
जिला के दो दर्जन से अधिक स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 350 से 400 के बीच है। स्कूलों में 80 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए केवल एक शिक्षक है। शिक्षा निदेशालय की ओर से स्कूलों के संचालन के लिए विद्यार्थियों की संख्या 25 निर्धारित की गई है।