नेरी गांव में 2002 में इतिहास शोध संस्थान की स्थापना की थी
विभाजन विभीषिका से त्रस्त हिंदुओं का संरक्षण करने में निभाई अहमभूमिका
संवाद न्यूज एजेंसी
रंगस (हमीरपुर)। ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी में शनिवार को संस्थान के संस्थापक ठाकुर रामसिंह की 14वीं पुण्यतिथि पर हवन यज्ञ और भजन-कीर्तन करवाया गया। संस्थान के सचिव एवं निदेशक सदस्य प्यार चंद परमार ने ठाकुर रामसिंह को स्मरण करते हुए कहा कि असंख्य लोग उनसे प्रेरणा लेते हैं।
रामसिंह का जन्म हमीरपुर जिले के भोरंज में हुआ था लेकिन अपना सारा जीवन राष्ट्र कार्य के लिए समर्पित किया। प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद ठाकुर रामसिंह उच्च शिक्षा के लिए लाहौर चले गए। वहां से प्रथम श्रेणी में स्नातक एवं इतिहास विषय में स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसी दौरान उनका संपर्क अनेक क्रांतिकारियों से हुआ।
उनमें से एक बलराज मधोक भी थे जो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता थे। उन्हीं के माध्यम से ठाकुर रामसिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। संघ का तृतीय वर्ष का शिक्षण प्राप्त कर उन्होंने अपना पूरा जीवन संघ के प्रचारक के रूप में समर्पित कर दिया। विभाजन के समय वह अमृतसर में प्रचारक थे। वहां उन्होंने विभाजन विभीषिका से त्रस्त हिंदुओं का संरक्षण करने में अहम भूमिका निभाई। इतिहास के प्रति रुचि को देखते हुए ठाकुर रामसिंह को इतिहास संकलन योजना समिति के कार्य को खड़ा करने का कार्य सौंपा गया। इसी ध्येय को साकार रूप देने के लिए अपने जीवन के अंतिम वर्षों में उन्होंने इतिहास कार्य पर तथ्यात्मक शोध कार्य के लिए हमीरपुर जिला के नेरी गांव में 2002 में शोध संस्थान की स्थापना की। अंत में संस्थान के महासचिव भूमिदत्त शर्मा ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया।