हमीरपुर। जिला मुख्यालय हमीरपुर में बस स्टैंड के बाहर मुख्य मार्ग के किनारे खोखों को हटाने की प्रक्रिया पर प्रदेश उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। उच्च न्यायालय से मामले में स्टे के कारण जिला प्रशासन की खोखा मार्केट की जगह को खाली करवाने की मुहिम को झटका लगा है। बुधवार को प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमथ ने खोखों को हटाने की प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए लोक निर्माण विभाग हमीरपुर से चार हफ्ते के भीतर इस मामले में रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किए हैं।
नगर परिषद हमीरपुर ने करीब चालीस वर्ष पहले बस स्टैंड हमीरपुर के बाहर खोखा मार्केट का निर्माण किया था। नगर परिषद ने करीब 58 दुकानदारों को यह खोखे आवंटित कर उनसे प्रतिमाह किराया वसूला, लेकिन करीब दो साल पहले जिला प्रशासन ने सड़क किनारे से इन खोखों को हटाकर दुकानदारों को शॉपिंग कांप्लेक्स में शिफ्ट करने की योजना तैयार की। जिला प्रशासन ने पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर शॉपिंग कांप्लेक्स में पक्की दुकानें आवंटित कीं। प्रशासन ने 58 में से 46 खोखों को हटाकर दुकानदारों को कांप्लेक्स में पक्की दुकानें आवंटित कर दी हैं, लेकिन जिला प्रशासन की दुकान आवंटन प्रक्रिया से नाखुश करीब 12 खोखाधारकों ने प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी। जिस पर बुधवार को सुनवाई हुई और फिलहाल खोखों को हटाने की प्रक्रिया पर आगामी आदेशों तक रोक लगा दी गई है। उधर, प्रदेश उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता वीसी नेगी और नितिन ठाकुर ने कहा कि बुधवार को प्रदेश उच्च न्यायालय से हमीरपुर के खोखों को हटाने की प्रक्रिया पर रोक लगाने के आदेश जारी हुए हैं। लोनिवि को चार हफ्ते के भीतर जवाब देने के आदेश जारी हुए हैं।
न्यायालय में विचाराधीन मामले के बावजूद हटा दिया खोखा
लोक निर्माण विभाग ने खोखा मार्केट में बीते दिन एक ऐसा खोखा भी गिरा दिया, जिस पर अभी तक न्यायालय में मामला चल रहा है। न्यायालय में विचाराधीन मामले के बावजूद खोखा गिराने के मामले में लोनिवि की दिक्कतें बढ़ गई हैं। संबंधित खोखा धारक अब इस मामले में लोनिवि के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर करवाने जा रहा है। जिससे आने वाले समय में लोनिवि की दिक्कतें बढ़ सकती हैं।