जिला हमीरपुर के राशन कार्ड का रिकॉर्ड खाद्य आपूर्ति विभाग के रिकॉर्ड के साथ मेल नहीं खा रहा। राशन कार्ड के रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आने पर खाद्य आपूर्ति विभाग ने जांच शुरू कर दी है। विभाग के अधिकारी अब जिले की एक-एक पंचायत में जाकर राशन कार्ड की जांच करेंगे।
रिकॉर्ड के मेल न खाने से प्रदेश सरकार की डिजिटल राशनकार्ड स्कीम में तकनीकी दिक्कतें पेश आ रही हैं। जिले में डिजिटाइज्ड डाटा और स्टैंप्ड डाटा में भारी अंतर सामने आया है। विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, जिले में 1,22,916 राशनकार्ड धारक हैं जबकि डिजिटाइज्ड डाटा के मुताबिक 1.89 लाख राशन कार्ड सामने आ रहे हैं।
स्टैंप्ड डाटा के मुताबिक जिले में दो लाख राशन कार्ड हैं। इस सारे रिकॉर्ड को सही करने के लिए खाद्य आपूर्ति विभाग ने पंचायतों में रिकॉर्ड की चेकिंग शुरू कर दी है। विभाग के अधिकारी सच्चाई का जानने के लिए फील्ड में उतर गए हैं।
पंचायतों में तीन तरह के राशन कार्ड
पंचायतों में तीन तरह के राशन कार्ड बने हैं। नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट (एनएफएसए), बीपीएल और अंतोदय अन्न योजना के तहत राशनकार्ड धारकों को राशन दिया जा रहा है। राजीव गांधी अन्न योजना के तहत प्रदेश में तीन किलो गेहूं और दो किलो चावल उचित मूल्य की दुकानों में पीडीएस के तहत मिल रहे हैं। बीपीएल और अंतोदय को भी सस्ती दरों पर राशन दिया जा रहा है।
जिला खाद्य नियंत्रक प्रताप सिंह चौहान ने कहा कि जिला के डिजिटाइज्ड डाटा और स्टैंप्ड डाटा में भारी अंतर सामने आया है। उन्होंने बताया कि राशनकार्ड के आंकड़े को सही करने के लिए पंचायतों में जाकर रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।