हमीरपुर। त्योहारी सीजन में चीड़ की पत्तियां स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए रोजगार का साधन बनी हुई हैं। चीड़ की पत्तियों को टोकरियों का आकार देकर महिलाएं स्वरोजगार के सपनों को साकार कर रही हैं।
गणेश स्वयं सहायता समूह नाहलवीं की महिलाओं ने इस बार दिवाली के लिए घर पर ईको फ्रेंडली प्रोडेक्टस तैयार किए हैं, जिन्हें लोग अपने रिश्तेदारों को गिफ्ट कर सकेंगे। ईको फ्रेंडली प्रोडेक्टस शगुन की टोकरी, थाली और फूलदान सहित अन्य सामान को चीड़ की सूखी पत्तियों से तैयार किया गया है, जो कि आसानी से कंपोस्ट हो जाते हैं।
स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं में अनीता, चंपा, सीमा, नेहा ने कहा कि तीन वर्ष पहले उन्होंने खंड विकास अधिकारी कार्यालय हमीरपुर के माध्यम से आयोजित कार्यशाला में प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद इस कार्य को करने का निर्णय लिया।
शुरुआती दौर में घर से उत्पादों को बेचने का कार्य शुरू किया, लेकिन डिमांड कम होने के कारण व्यवसाय अच्छे से नहीं हो पा रहा था। ऐसे में इस बार ग्रामीण विकास एजेंसी हमीरपुर की ओर से प्रदान किए गए स्टाॅल में उत्पाद बेचने का कार्य शुरू किया। इससे अब प्रतिमाह 12 से 15 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।
बाजार में शगुन की टोकरी, थाली, कटोरी, फूलदान लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं। लोग उत्पादों का विवाह-शादियों के लिए ऑर्डर दे रहे हैं। इससे महिलाओं को अच्छी आमदन हो रही है। संवाद
चीड़ की पत्तियों से तैयार की गई टोकरी। संवाद
चीड़ की पत्तियों से तैयार की गई टोकरी। संवाद