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नादौन अस्पताल में डॉक्टरों का कारनामा, निजी क्लीनिक रेफर किए जा रहे मरीज

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हमीरपुर। सिविल अस्पताल नादौन में अल्ट्रासाउंड मशीन होने के बावजूद मरीजों को निजी क्लीनिक रेफर किया जा रहा है। रेडियोलोजिस्ट का पद खाली होने के कारण यहां पर अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे। नियमों के अनुसार किसी भी सरकारी अस्पताल का डॉक्टर मरीजों को निजी अस्पताल व क्लीनिक में उपचार व टेस्ट के लिए बाध्य नहीं कर सकता। न ही ब्रांडेड दवाई पर्ची पर लिख सकता है। बावजूद जिला हमीरपुर में इन नियमों की जमकर अवहेलना की जा रही है।
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सिविल अस्पताल नादौन के चिकित्सक सरकार के आदेशों को नजरअंदाज कर मरीजों की पर्चियों पर अल्ट्रासाउंड के लिए निजी क्लीनिक का नाम लिख रहे हैं। इसके पीछे कमीशन का खेल है या कुछ और यह तो जांच के बात ही स्पष्ट हो पाएगा। हैरानी की बात है पर्ची पर जिस क्लीनिक पर टेस्ट के लिए लिखा जा रहा है, वह क्लीनिक जिला कांगड़ा के अंतर्गत ज्वालामुखी ब्लॉक में आता है। सरकारी अस्पताल में बहुत ही कम दर पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा प्रदान की जाती है। बीपीएल और गर्भवती महिलाओं को निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा होती है। सरकार के इन सुविधाओं के बावजूद महिलाओं और निर्धन वर्ग को सरकारी अस्पतालों में कोई सुविधा नहीं मिल रही। मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड समेत अन्य टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं।
उपमंडल नादौन के लोगों सुरेश शर्मा, विनोद पठानिया, विजय ठाकुर, सुनील और शुभम ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी हमीरपुर और प्रदेश सरकार से इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी हमीरपुर डॉ. अर्चना सोनी ने कहा कि इस बारे में अभी तक लिखित में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई। फिर भी मामले की जांच की जाएगी। इस बारे में बीएमओ नादौन से रिपोर्ट मांगी गई है। वहीं बीएमओ नादौन डॉ. अशोक कौशल ने कहा कि कोई भी चिकित्सक किसी निजी क्लीनिक में मरीजों को नहीं भेज सकता। मामले की जांच की जाएगी।
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