हमीरपुर। लॉकडाउन और कर्फ्यू के दौरान जिले में मेडिकल स्टोर बंद रहने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सिर्फ कर्फ्यू में ढील के दौरान ही रोजाना सुबह 7 बजे से 10 बजे तक ही मेडिकल स्टोर खुले रहते हैं। कर्फ्यू में ढील के बाद इमरजेंसी में इंसानों को अपने उपचार के लिए मेडिकल स्टोर पर दवाइयां उपलब्ध नहीं हो रही हैं। अस्पताल में चेकअप के दौरान सरकारी सप्लाई में मिलने वाली कई दवाइयां उपलब्ध नहीं होती हैं। जिसके चलते मरीजों को प्राइवेट मेडिकल स्टोर का रुख करना पड़ रहा है। लेकिन, मेडिकल स्टोर बंद रहने से मरीजों का मर्ज और भी बढ़ रहा है। कुछ यही हाल पशुपालकों का भी है। हमीरपुर में अधिकतर लोगों की आजीविका का साधन दुग्ध उत्पादन है।
किसानों ने गाय और भैंस के अलावा बकरियां पाली हुई हैं। लेकिन, मवेशियों के बीमार होने पर उन्हें घर के नजदीक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही। चूंकि, जिले में कर्फ्यू के दौरान अधिकतर वेटरनरी डिस्पेंसरियां बंद हैं। कर्फ्यू के दौरान जिले में केवल बड़े पशु चिकित्सालय ही खुले रहते हैं जोकि गांव से काफी दूर होने के चलते किसानों और पशुपालकों की पहुंच से बहुत दूर हैं। हमीरपुर जिला में 116 रेगुलर वेटरनरी डिस्पेंसरियों की संख्या हैं, 99 मुख्यमंत्री आरोग्य पशु औषधालय हैं। पशु चिकित्सालयों की संख्या 16 है। जहां पर मवेशियों का इलाज किया जाता है। लेकिन, वर्तमान में लॉकडाउन और कर्फ्यू के कारण डिस्पेंसरियां बंद हैं। पशुपालकों विधि चंद, किशोरी लाल, सुरेश ठाकुर, प्रदीप कुमार और प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार को सभी वेटरनरी और मेडिकल स्टोर को दिनभर खुला रखने के आदेश जारी करने चाहिए।
इस बारे में पशुपालन विभाग हमीरपुर के उपनिदेशक डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि वेटरनरी डिस्पेंसरियां बंद हैं। केवल पशु चिकित्सालयों को ही खोलने के आदेश हैं। अगर गांव में किसी पशुपालक के मवेशी को कोई बीमारी है तो उसे ऑन कॉल चिकित्सक और फार्मासिस्ट को भेजा जा सकता है।