हमीरपुर। जिले में टीबी मरीजों की बेहतर देखभाल और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की पहल की है। आशा कार्यकर्ता सप्ताह में कम से कम एक बार टीबी मरीज के घर जाकर उसकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी लेंगी।
वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) प्रत्येक 15 दिन में मरीज की स्थिति की निगरानी करेंगे। स्वास्थ्य विभाग ने सभी बीएमओ को निर्देश जारी कर आशा कार्यकर्ताओं के विजिट को अधिक प्रभावी बनाने को कहा है।
विजिट के दौरान आशा कार्यकर्ता मरीज के नियमित दवा सेवन, किसी परेशानी या स्वास्थ्य में बदलाव की जानकारी लेंगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित करेंगी कि मरीज निर्धारित समय पर टीबी की दवा ले रहा है या नहीं।
स्वास्थ्य विभाग का फोकस अब मरीज को दवा उपलब्ध कराने के साथ उपचार के दौरान उसकी नियमित निगरानी पर भी रहेगा। आशा कार्यकर्ता मरीज के घर पहुंचकर दवा सेवन की स्थिति की जानकारी लेंगी और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग को सूचित करेंगी।
जिले में टीबी के मामलों और इससे होने वाली मौतों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। आशा कार्यकर्ताओं द्वारा पहले से ही मरीजों का घर जाकर फॉलोअप किया जाता है, लेकिन अब सभी बीएमओ को इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं।
बॉक्स
21 माह में 86 मरीजों की मौत
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 21 माह में जिले में टीबी से पीड़ित 86 मरीजों की मौत हुई है। इनमें वर्ष 2025 में 52 और वर्ष 2026 में अब तक 34 मरीजों की मौत हुई है। विभाग के अनुसार, मृत मरीजों में कई ऐसे भी थे, जो टीबी के साथ अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की नियमित निगरानी को अहम माना है।
कोट
टीबी मरीजों को समय पर दवाई उपलब्ध करवाई जाती है। आशा कार्यकर्ता के विजिट को पहले से अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
-डॉ. सतीश कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, हमीरपुर